अलनीनो से बदली हवाओं की दिशा, उत्तर-पश्चिम से आ रही सूखी हवाएं बनीं वजह; बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम नहीं बना
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में इस बार मानसून ने बारिश और विदाई, दोनों में अलग तस्वीर दिखाई है। पूरे सीजन में सामान्य से 5% ज्यादा यानी 1195.1 मिमी बारिश होने के बावजूद मानसून 10 साल में सबसे जल्दी विदा हो रहा है। 2 अक्टूबर से मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है और अगले 48 घंटे में इसके पूरे प्रदेश से लौटने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे अलनीनो का प्रभाव, उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश और बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम का नहीं बनना प्रमुख कारण हैं।
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक बीके चिंधालोरे के अनुसार इस बार मानसून की समय से पहले विदाई के पीछे वैश्विक जलवायु कारकों के साथ हवाओं का बदला रुख मुख्य वजह है। इस वर्ष अलनीनो का प्रभाव बारिश के सीजन पर पड़ा। छत्तीसगढ़ में मानसून के दौरान सामान्य वर्षा 1142.1 मिमी होती है, जबकि इस बार 1195.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 5% अधिक है। इसके बावजूद देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों, खासकर राजस्थान और पंजाब में बारिश सामान्य से कम रही।
उत्तर-पश्चिम से आ रही सूखी हवाएं
मानसून की वापसी सामान्य तौर पर उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होती है। इन क्षेत्रों में बारिश कम होने के कारण इस बार मानसून की विदाई की प्रक्रिया भी जल्दी शुरू हो गई। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक वर्तमान में उत्तर-पश्चिमी दिशा से पाकिस्तान और पंजाब के रास्ते शुष्क हवाएं आ रही हैं। इनमें नमी की मात्रा कम होने के कारण मानसूनी गतिविधियां कमजोर हो रही हैं।
यदि बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत अवदाब बनता तो मानसून की वापसी में देरी हो सकती थी, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई मजबूत सिस्टम नहीं बना है। हालांकि पिछले सप्ताह बने एक सिस्टम के कारण मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में अच्छी बारिश हुई। इससे प्रदेश में बारिश का आंकड़ा पहले के -6% से सुधरकर +5% पहुंच गया।
जल्द बढ़ेगा ठंड का असर
मानसून की जल्द विदाई के साथ प्रदेश में उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं का प्रभाव बढ़ने की संभावना है। इससे तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी और मौसम में ठंडक बढ़ेगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले सप्ताह से रात के तापमान में गिरावट का दौर शुरू हो सकता है।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बलरामपुर में सामान्य से 55% अधिक और नारायणपुर में 40% ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। बिलासपुर, दुर्ग, कांकेर और राजनांदगांव में सामान्य बारिश हुई, जबकि बेमेतरा, जशपुर और सरगुजा में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई।