28 और 29 अक्टूबर को हुई बारिश से खेतों में कटी रखी फसल को सबसे ज्यादा नुकसान, 47 हजार किसानों का फसल बीमा; क्रॉप कटिंग के बाद मिलेगा मुआवजा


बिलासपुर। अर्नब चक्रवात के असर से 28 और 29 अक्टूबर को हुई बारिश ने जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती सर्वे में 41 गांवों में करीब 90 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित होने का पता चला है। सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को हुआ है, जिन्होंने धान की कटाई कर फसल खेतों में सुखाने के लिए फैला दी थी या करपा बनाकर रखा था। बारिश के पानी से धान की गुणवत्ता के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ा है। अब किसानों को नुकसान के आकलन और मुआवजे का इंतजार है।


बारिश के बाद फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका को देखते हुए कलेक्टर ने कृषि विभाग के अधिकारियों को सर्वे करने के निर्देश दिए थे। विभाग का प्राथमिक सर्वे पूरा हो चुका है। ब्लॉकवार आंकड़ों के अनुसार बिल्हा में करीब 39 हेक्टेयर, कोटा-रतनपुर क्षेत्र में 33 हेक्टेयर, मस्तूरी में 11 हेक्टेयर और तखतपुर में 7 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन अभी बाकी है।


बेलगहना में सबसे ज्यादा 48.2 मिमी बारिश


29 अक्टूबर को जिले में औसतन 31.1 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। बेलगहना तहसील में सर्वाधिक 48.2 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा मस्तूरी में 40.3 मिमी, बिलासपुर में 39.6 मिमी, पचपेड़ी में 42.2 मिमी, बेलतरा में 36 मिमी और रतनपुर में 32 मिमी बारिश दर्ज की गई। अचानक हुई बारिश के कारण खेतों में कटाई के बाद रखी फसल भीग गई। इससे धान के दाने काले पड़ने और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।


इन गांवों में सबसे ज्यादा नुकसान


प्राथमिक सर्वे में हिरीं, सेवार, कड़ार, धमनी, बिटकुली, परसदा, उमरिया, भटगांव, लूफा, मंझवानी, बहेरामुड़ा, चंगोरी, लिटिया, बेढ़ापाठ, तूलुफ, अमने, सेकर, केंदा, खैरा, करगीकला, लालपुर, पटैता और कुसमूली सहित 41 गांवों में फसल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।


47 हजार किसानों का फसल बीमा


जिले में करीब 47 हजार किसानों ने फसल बीमा कराया है। प्रभावित बीमित किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानों के अनुसार राहत मिल सकती है। वहीं, जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया है, उन्हें राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के तहत मुआवजा देने का प्रावधान है। फिलहाल पटवारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की टीमें गांवों में जाकर नुकसान का आकलन कर रही हैं। किसानों की मांग है कि सर्वे पारदर्शी तरीके से हो, ताकि वास्तविक नुकसान के अनुसार राहत मिल सके।


क्रॉप कटिंग के बाद वास्तविक नुकसान का पता चलेगा


कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एमआर तिग्गा के मुताबिक प्राथमिक सर्वे में 90 हेक्टेयर में फसल प्रभावित होने की जानकारी मिली है। वास्तविक नुकसान कितना हुआ है, इसका आकलन अभी किया जा रहा है। क्रॉप कटिंग और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।