बिलासपुर। जिले में लगातार हो रही बारिश से धान की खेती ने रफ्तार तो पकड़ ली है, लेकिन खेतों में मजदूरों की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। पर्याप्त श्रमिक नहीं मिलने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। इसका फायदा ठेकेदार उठा रहे हैं और मजदूर उपलब्ध कराने के लिए 5 हजार से 7,500 रुपए प्रति एकड़ तक मजदूरी वसूल रहे हैं। बढ़ती लागत और श्रमिकों की कमी के चलते जिले में अब भी करीब 40 फीसदी धान की रोपाई शेष है। इसके कारण खेती का पहला चरण पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 दिन पीछे चल रहा है।
कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले में 1 लाख 72 हजार 350 हेक्टेयर में धान की खेती की जा रही है। इसमें 1 लाख 790 हेक्टेयर में बोनी और 71 हजार 210 हेक्टेयर में रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बोनी का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन रोपाई की रफ्तार अपेक्षा से धीमी है। अब तक केवल लगभग 60 फीसदी रोपाई ही पूरी हो सकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक करीब 75 फीसदी रोपाई का कार्य पूरा हो गया था।
किसानों का कहना है कि इस बार अधिकांश क्षेत्रों में एक साथ रोपाई शुरू होने से मजदूरों की मांग अचानक बढ़ गई है। मांग बढ़ने के कारण मजदूरी दरों में भी भारी इजाफा हुआ है।
नवागांव के किसान राधेश्याम कौशिक ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार ठेकेदार करीब ढाई हजार रुपए प्रति एकड़ अधिक मांग रहे हैं। मोलभाव के बाद भी उन्हें 6,500 रुपए प्रति एकड़ की दर से रोपाई करानी पड़ रही है। वहीं सीपत के किसान रामकुमार साहू ने बताया कि उन्होंने समय रहते 5 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर पर रोपाई करवा ली थी। उधर मोहतरा के ठेकेदार सुखसागर बंजारे का कहना है कि मजदूरों की बढ़ी मांग और दूर-दराज से नर्सरी लाने की लागत बढ़ने के कारण रोपाई की दरों में वृद्धि हुई है।
इधर, जिले में मानसून की स्थिति सामान्य से बेहतर बनी हुई है। जिले की औसत वार्षिक वर्षा 1215.6 मिमी है। 31 जुलाई तक जिले में 567.4 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो इस अवधि की औसत 513 मिमी वर्षा से लगभग 10.6 फीसदी अधिक है। यानी जिले में अब तक कुल औसत वर्षा का 46.67 फीसदी हिस्सा पूरा हो चुका है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और अगले कुछ दिनों में पर्याप्त मजदूर उपलब्ध हो गए, तो शेष रोपाई समय पर पूरी की जा सकती है। हालांकि मजदूरों की कमी बनी रहने पर किसानों की लागत बढ़ने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
