नगर निगम बिलासपुर की सामान्य सभा के बाद बवाल, भाजपा-कांग्रेस पार्षदों में धक्कामुक्की, लिंगियाडीह बेजा कब्जा मामले में ज्ञापन देने आए लोगों ने किया चक्का जाम


बिलासपुर। नगर निगम की हंगामेदार सामान्य सभा समाप्त होते ही लिंगियाडीह आवास मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद सदन से सड़क तक आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि तीखी बहस धक्कामुक्की तक पहुंच गई और करीब एक घंटे तक चक्काजाम की स्थिति बनी रही।
ज्ञापन को लेकर टकराव
लिंगियाडीह के पार्षद दिलीप पाटिल ने मेयर पूजा विधानी से कहा कि वार्डवासी ज्ञापन देने आए हैं, वे बाहर आकर ज्ञापन ले लें। इस पर मेयर ने स्पष्ट किया कि यदि ज्ञापन देना है तो कार्यालय में दें, सदन की अपनी गरिमा होती है। इसी बात को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो आगे बढ़कर धक्कामुक्की में बदल गई।
84 दिन से आंदोलन, कोर्ट में मामला लंबित
लिंगियाडीह के रहवासी पिछले 84 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। निगम ने यहां कॉम्प्लेक्स और गार्डन निर्माण के लिए 113 मकानों का सर्वे किया है। मामला न्यायालय में लंबित है। मेयर का कहना है कि कोर्ट के फैसले के अनुरूप ही आगे की कार्रवाई होगी। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पट्टे के नाम पर पैसे लिए गए, लेकिन अब मकान तोड़ने की तैयारी की जा रही है।


ऑडिटोरियम के बाहर धरना, फिर चक्काजाम
लिंगियाडीह के लोग पहले लखीराम ऑडिटोरियम के बाहर धरने पर बैठे। सदन से निकलकर कांग्रेस पार्षद दल और शहर व जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। करीब एक घंटे तक सड़क पर चक्काजाम रहा, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्ट किया। इस दौरान निगम कमिश्नर, मेयर और सभापति ऑडिटोरियम के भीतर ही फंसे रहे।
कांग्रेस: हक की लड़ाई
शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस गरीबों के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पट्टे के लिए पैसे लेने के बावजूद लोगों को अधिकार नहीं दिए जा रहे। समझाइश के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।
भाजपा का पलटवार
भाजपा पार्षद जय वाधवानी ने आरोप लगाया कि वार्ड-52 के पार्षद दिलीप पाटिल ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर दुकान, स्कूल और मकान बनाकर किराए पर दिया है और निजी स्वार्थ में लोगों को आंदोलन के लिए उकसा रहे हैं।
“आप मुझे समझाएंगे?” – मेयर
लंच के दौरान पार्षद पति रामा बघेल द्वारा ज्ञापन लेने की बात कहे जाने पर मेयर ने कहा, “आप मुझे समझाएंगे?” उन्होंने दोहराया कि मामला कोर्ट में है और फैसला आने के बाद ही तय होगा कि मकान टूटेंगे या नहीं। सदन में दबाव बनाना उचित नहीं है।
सभापति विनोद सोनी ने कहा कि 25 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने ऐसी स्थिति नहीं देखी। सदन के बाहर हंगामा और चक्काजाम को गलत बताते हुए उन्होंने संबंधित पार्षद पर कार्रवाई की अनुशंसा की बात कही।
नगर निगम की सामान्य सभा के बाद सड़क तक पहुंचे इस विवाद ने शहर की राजनीति को फिर गरमा दिया है।

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