बिलासपुर। अरपा नदी में गिर रहे गंदे पानी और सीवेज के ट्रीटमेंट को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने शपथपत्र पेश कर बिलासपुर की सीवेज व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट की। सरकार के अनुसार शहर से रोजाना औसतन 72.20 एमएलडी गंदा पानी निकल रहा है, जबकि 78 एमएलडी क्षमता वाले चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में वर्तमान में सिर्फ 43.90 एमएलडी सीवेज ही ट्रीट हो रहा है।

इस हिसाब से करीब 28.30 एमएलडी सीवेज का ट्रीटमेंट नहीं हो पा रहा है। यानी शहर में निकलने वाले कुल सीवेज का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा ट्रीटमेंट व्यवस्था से बाहर रह जा रहा है। इससे अरपा नदी में प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है। शपथपत्र वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की ओर से पेश किया गया।

शहर में 70 नाले, कई जगह नदी में पहुंच रहा सीवेज

शासन ने कोर्ट को बताया कि बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की 2026 की अनुमानित आबादी 6 लाख 68 हजार 540 है। शहर में कुल 70 नाले हैं। इनमें 35 नाले उत्तरी और 35 नाले दक्षिणी छोर पर हैं। इनमें 5 उत्तरी और 6 दक्षिणी नाले प्रमुख हैं। इन नालों के जरिए सीवेज एसटीपी तक पहुंचाया जाता है, लेकिन कुछ स्थानों पर सीवेज के सीधे नदी में जाने की स्थिति भी बनी हुई है।

दो नए प्लांट दिसंबर तक होंगे तैयार

शासन ने बताया कि मंगला में 16 एमएलडी क्षमता के दो नए एसटीपी तैयार किए जा रहे हैं। इनमें मंगला-बी की क्षमता 10 एमएलडी है और करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके इलेक्ट्रोमैकेनिकल काम को 31 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

वहीं मंगला-डी की क्षमता 6 एमएलडी है। इसका सिविल और इलेक्ट्रोमैकेनिकल काम पूरा हो चुका है और फिलहाल ट्रायल रन चल रहा है। दोनों प्लांट शुरू होने के बाद शहर की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 78 से बढ़कर 94 एमएलडी हो जाएगी।

100 प्रतिशत सीवेज ट्रीटमेंट की नई कार्ययोजना

सरकार ने शपथपत्र में माना है कि मौजूदा एसटीपी की कम उपयोगिता को दूर करना जरूरी है। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग तकनीकी परीक्षण कर नई कार्ययोजना तैयार कर रहा है। उद्देश्य यह है कि शहर से निकलने वाले शत-प्रतिशत सीवेज का ट्रीटमेंट करने के बाद ही पानी अरपा नदी में छोड़ा जाए।

124 करोड़ की फायर ब्रिगेड खरीदी का रास्ता साफ

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रदेश में करीब 124 करोड़ रुपए की लागत से अग्निशमन वाहनों की खरीदी का रास्ता भी साफ हो गया है। 19 अगस्त को हाईकोर्ट के निर्देश के बाद वित्त विभाग ने खरीदी के लिए राशि खर्च करने की समय सीमा बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इसकी जानकारी सोमवार को वित्त सचिव के शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में दी गई।

शपथपत्र के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण निर्धारित राशि खर्च करने की समय सीमा समाप्त हो गई थी। अब वित्त विभाग ने इसे 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। इससे करीब छह महीने से लंबित खरीदी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। वाहनों की खरीदी के लिए टेंडर समेत अन्य प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और मामला अंतिम चरण में है।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और न्याय मित्र अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को इसकी जानकारी दी।

फायर स्टेशनों के अपग्रेडेशन के लिए 100 करोड़ का प्रस्ताव

न्याय मित्र सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि गृह सचिव के शपथपत्र में करीब 100 करोड़ रुपए के एक अन्य प्रस्ताव का भी उल्लेख है। यह राशि प्रदेश के फायर स्टेशनों के अपग्रेडेशन और अग्निशमन उपकरणों की खरीदी के लिए प्रस्तावित है। प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है। हाईकोर्ट ने इस पर विचार कर राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।