तीन नोटिस के बाद भी ठेकेदार ने नहीं किया काम पूरा, 80 फीसदी भुगतान पहले ही; पुरानी ओटी में रोज मुश्किल से 4-5 ऑपरेशन
बिलासपुर। जिला अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन की सुविधा बढ़ाने के लिए 1.90 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही मॉड्यूलर आई ओटी निर्माण की समयसीमा गुजरने के बाद भी अधूरी है। इसका निर्माण जुलाई में पूरा होना था, लेकिन अब तक करीब 20 प्रतिशत काम बाकी है। ठेकेदार को तीन बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि निर्माण के लिए करीब 80 प्रतिशत भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इसका खामियाजा मोतियाबिंद के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। नई ओटी शुरू होने पर जहां रोजाना 20 तक ऑपरेशन हो सकते थे, वहीं पुरानी ओटी में मुश्किल से 4 से 5 मरीजों का ही ऑपरेशन हो पा रहा है।
एक ओर जिला अस्पताल की नई ओटी का निर्माण अटका हुआ है, दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने इस साल जिले में 20 हजार मोतियाबिंद ऑपरेशन करने का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य पूरा करने के लिए अब निजी अस्पतालों का सहारा लिया जा रहा है। विभाग ने 9 निजी अस्पतालों को भी अभियान में शामिल किया है, जहां सरकारी योजनाओं के तहत मरीजों का निःशुल्क ऑपरेशन किया जाएगा। सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने संबंधित अस्पतालों को ऑपरेशन शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। 15 नवंबर से सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑपरेशन की संख्या बढ़ाने की तैयारी है।
तीन नोटिस के बाद भी निर्माण अधूरा
जिला अस्पताल में मॉड्यूलर आई ओटी का निर्माण आधुनिक सुविधाओं के साथ अधिक संख्या में ऑपरेशन करने के उद्देश्य से कराया जा रहा है। इसकी समयसीमा जुलाई निर्धारित की गई थी, लेकिन निर्माण एजेंसी की धीमी गति के कारण काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर के अनुसार ठेकेदार को काम में तेजी लाने के लिए तीन बार नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद करीब 20 प्रतिशत काम बाकी है। निर्माण पूरा हुए बिना नई ओटी शुरू करना संभव नहीं है।
नई ओटी शुरू होने से जिला अस्पताल में रोजाना करीब 20 मोतियाबिंद ऑपरेशन करने की क्षमता विकसित हो सकती थी। फिलहाल पुरानी ओटी में सीमित संसाधनों और क्षमता के कारण प्रतिदिन केवल 4 से 5 ऑपरेशन हो पा रहे हैं। दीपावली के बाद नई ओटी शुरू करने की अस्पताल प्रबंधन की योजना भी निर्माण अधूरा रहने के कारण टल गई है।
9 निजी अस्पतालों में भी होंगे निःशुल्क ऑपरेशन
स्वास्थ्य विभाग ने मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य पूरा करने के लिए निजी अस्पतालों की भागीदारी बढ़ाई है। अब सिम्स और जिला अस्पताल के अलावा जुनेजा हॉस्पिटल, मार्क हॉस्पिटल, जय अंबे हॉस्पिटल, संकल्प हॉस्पिटल, नोबल मेडिकेयर, यूनिटी हॉस्पिटल, वेगस हॉस्पिटल, संजीवनी हॉस्पिटल और श्रीनाथ नेत्रालय में भी सरकारी योजनाओं के तहत निःशुल्क ऑपरेशन किए जाएंगे।
45 नेत्र सहायक अधिकारियों ने किया सर्वे
अभियान के तहत ऑपरेशन की जरूरत वाले मरीजों की पहचान के लिए पहले ही सर्वे कराया जा चुका है। जिले के 45 सहायक नेत्र अधिकारियों ने गांवों और शहरी क्षेत्रों में सर्वे कर मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को चिह्नित किया है। स्वास्थ्य विभाग ने 15 नवंबर से ऑपरेशन की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। ठंड के मौसम में मोतियाबिंद के ऑपरेशन अधिक किए जाते हैं। ऑपरेशन के बाद मरीजों को आंखों की विशेष देखभाल, नियमित जांच और निर्धारित दवाइयों का इस्तेमाल करना होता है।
पिछले साल 22 हजार के लक्ष्य पर हुए थे 17,527 ऑपरेशन
पिछले साल जिले को 22 हजार मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन इसके मुकाबले 17,527 ऑपरेशन ही हो सके। इस बार लक्ष्य घटाकर 20 हजार किया गया है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि 9 निजी अस्पतालों की भागीदारी से लक्ष्य के करीब पहुंचा जा सकेगा। हालांकि, जिला अस्पताल की मॉड्यूलर आई ओटी का निर्माण समय पर पूरा नहीं होना स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर सवाल खड़े कर रहा है। जब नई ओटी से रोजाना 20 ऑपरेशन करने की क्षमता विकसित हो सकती थी, तब तीन नोटिस के बाद भी निर्माण अधूरा रहना और 80 प्रतिशत भुगतान हो जाना जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।