6 साल पहले हटाया गया, इमलीभाठा में अब तक मूलभूत सुविधाओं का इंतजार; विधायक ने कलेक्टर से चर्चा कर समस्या दूर करने का दिया भरोसा

बिलासपुर। चांटापारा-तिलक नगर से विस्थापित हुए 300 से अधिक लोग सोमवार को एक बार फिर पुराने स्थान पर पुनर्वास की मांग लेकर विधायक अमर अग्रवाल के बंगले पहुंचे। रहवासियों ने अपनी समस्याएं बताते हुए कहा कि वे भाजपा के वोटर और कार्यकर्ता हैं, इसके बावजूद 6 साल से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। उन्होंने चांटापारा में खाली पड़ी करीब 70 हजार वर्गफीट जमीन पर ही दोबारा बसाने की मांग की।

रहवासियों ने बताया कि 8 जून 2020 को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अरपा नदी किनारे बसे चांटापारा के करीब 85 मकानों में रहने वाले 250 परिवारों को हटाकर इमलीभाठा स्थित आईएचएसडीपी योजना के मकानों में शिफ्ट किया गया था। उनका कहना है कि इमलीभाठा में अब तक पेयजल, शौचालय और मकानों में सीपेज जैसी समस्याएं दूर नहीं हो सकी हैं। इसी वजह से वे लगातार पुराने स्थान पर पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

सोमवार सुबह करीब 11 बजे से विस्थापित लोग विधायक के बंगले पहुंचने लगे। संख्या बढ़ने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने विधायक अमर अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी मांग रखी। रहवासियों ने कहा कि जब अमर अग्रवाल मंत्री थे, तब उन्हें आश्वासन मिला था कि चांटापारा से उनके आशियाने नहीं हटाए जाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरे स्थानों से हटाए गए लोगों को वहीं आवास बनाकर बसाया गया, तो चांटापारा के लोगों को दूसरी जगह क्यों भेजा गया।

रहवासियों ने चांटापारा में खाली पड़ी करीब 70 हजार वर्गफीट जमीन की विधिवत नाप-जोख कर ड्राइंग-डिजाइन तैयार कराने और उसी स्थान पर आवासीय ब्लॉक बनाकर प्रभावित परिवारों को बसाने की मांग की। उन्होंने बताया कि अब इस जमीन पर ऑक्सीजोन गार्डन बनाए जाने की चर्चा है।

विस्थापितों ने यह भी कहा कि चांटापारा से हटाए जाने के बाद भी वे वार्ड क्रमांक 18 के मतदाता हैं। मतदान के लिए अब भी चांटापारा के ही मतदान केंद्र पर आते हैं। वे अपनी मांग को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से भी गुहार लगा चुके हैं। विधायक अमर अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याएं सुनीं और कलेक्टर से चर्चा कर समाधान कराने का भरोसा दिया।