बिलासपुर। एनएच-130 पर प्रस्तावित 4-लेन उत्तरी बाइपास के लिए जमीन सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बाइपास के एलाइनमेंट में आने वाली जमीन की अब खरीद-फरोख्त और आपसी बंटवारा नहीं किया जा सकेगा। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह प्रतिबंध अंतिम भू-अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक अधिसूचना जारी होने तक प्रभावी रहेगा।
उत्तरी बाइपास का प्रस्तावित एलाइनमेंट करीब 20.921 किलोमीटर लंबा है। इसमें सेंदरी, रमतला, बिरकोना, नगोई, बिजोर, मोफ्का, दोमुहानी और ढेका गांव की जमीन शामिल है। इन आठ गांवों के कुल 644 खसरे बाइपास के एलाइनमेंट में आ रहे हैं।
जमीन के अवैध हस्तांतरण की आशंका
एनएचएआई ने भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले एलाइनमेंट में शामिल जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त और छोटे भूखंडों में बंटवारे की आशंका जताई थी। प्रशासन के अनुसार यदि भू-अधिग्रहण से पहले जमीन का हस्तांतरण या विभाजन होता है तो इससे अधिग्रहण की लागत बढ़ सकती है। साथ ही मुआवजा निर्धारण और भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया जटिल होने से परियोजना में देरी की स्थिति बन सकती है।
इसी को देखते हुए एलाइनमेंट में शामिल जमीन के अंतरण और बंटवारे पर रोक लगाई गई है। प्रशासन का उद्देश्य भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने तक जमीन की मौजूदा स्थिति को सुरक्षित रखना है।
मूल भू-स्वामियों के हित सुरक्षित रखने पर जोर
उत्तरी बाइपास को सार्वजनिक महत्व की बड़ी परियोजना माना जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक भू-अधिग्रहण के दौरान जमीन के अनधिकृत हस्तांतरण या विभाजन से परियोजना की प्रक्रिया प्रभावित न हो और मूल भूमि स्वामियों के हित सुरक्षित रहें, इसके लिए प्रतिबंध लगाया गया है।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि अंतिम भू-अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने तक एलाइनमेंट क्षेत्र की जमीन पर लगाए गए प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।