बिजली और जल संसाधन विभाग की लापरवाही साबित नहीं होने पर कोर्ट का फैसला

बिलासपुर। सरकारी ट्यूबवेल के पैनल में करंट लगने से किसान की मौत के मामले में परिवार को मुआवजा देने का दावा कोर्ट ने खारिज कर दिया है। बिजली और जल संसाधन विभाग की लापरवाही साबित नहीं होने पर अदालत ने 6 लाख 66 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति की मांग नामंजूर कर दी। नवम जिला न्यायाधीश अगम कुमार कश्यप की अदालत ने यह फैसला सुनाया।

रतनपुर थाना क्षेत्र के रानीगांव निवासी गोरेलाल निर्मलकर की 29 जून 2017 को दोपहर करीब 12 बजे करंट लगने से मौत हो गई थी। वह खेत की ओर गए थे। इसी दौरान कुमिहाखार स्थित सरकारी ट्यूबवेल क्रमांक 16 के पैनल की चपेट में आ गए। परिजनों का आरोप था कि ट्यूबवेल का पैनल खुले में और असुरक्षित स्थिति में था। वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे।

परिवार ने अदालत में बताया कि गोरेलाल ही परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी असमय मृत्यु से पत्नी और बेटी बेसहारा हो गईं। परिवार को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी। संबंधित विभागों से मुआवजा नहीं मिलने पर परिजनों ने अदालत में 6.66 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति का दावा पेश किया था।

विभागों ने जिम्मेदारी से किया इनकार

जल संसाधन विभाग की ओर से अदालत में कहा गया कि ट्यूबवेल के पैनल बॉक्स में ताला लगा रहता था और उसके संचालन के लिए कर्मचारी नियुक्त था। वहीं, बिजली विभाग ने कहा कि घटनास्थल पर उसके बिजली के तार टूटने का कोई प्रमाण नहीं मिला। मामले में यह भी बताया गया कि ट्यूबवेल के पैनल बॉक्स के पास केबल का तार छिला हुआ था और उसके संपर्क में आने से हादसा हुआ।

अदालत ने दोनों विभागों की लापरवाही साबित नहीं होने के आधार पर परिवार का मुआवजे का दावा खारिज कर दिया।