बिलासपुर। पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रदेश के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे हर समय चालू और कार्यशील रहने चाहिए। प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही के कारण किसी भी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के नष्ट होने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि थानों में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था स्थापित करने का उद्देश्य पुलिस तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के साथ आपराधिक न्याय प्रणाली के संपर्क में आने वाले लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा करना है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा संवैधानिक क्षेत्राधिकार के तहत जारी निर्देशों का अक्षरश: पालन सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।

18 महीने पुरानी फुटेज स्टोरेज खत्म होने से हुई डिलीट

मामला गौरेला थाने में दर्ज एक NDPS प्रकरण से जुड़ा है। आरोपी बनवारी लाल गुप्ता सहित चार आरोपियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि कथित घटना से एक दिन पहले ही उन्हें थाने में बैठा लिया गया था। अपनी बात साबित करने के लिए आरोपियों ने 13 से 15 सितंबर 2024 के बीच थाने की CCTV फुटेज, मोबाइल CDR और टावर लोकेशन उपलब्ध कराने की मांग की थी।

ट्रायल कोर्ट में पुलिस की ओर से बताया गया कि संबंधित CCTV सिस्टम में फुटेज की स्टोरेज अवधि 18 महीने थी। अवधि पूरी होने के बाद पुरानी फुटेज सिस्टम से स्वतः डिलीट हो चुकी थी। रिकॉर्ड देखने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि जब संबंधित फुटेज उपलब्ध ही नहीं है, तो उसे पेश करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

पर्याप्त पावर बैकअप और लगातार मॉनिटरिंग जरूरी

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से अपेक्षा जताई कि वह सक्षम अधिकारियों और गठित निगरानी समितियों के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती, प्रभावी और निरंतर तरीके से पालन सुनिश्चित करे।

कोर्ट ने कहा कि सभी थानों में CCTV कैमरों की नियमित जांच और सतत मॉनिटरिंग होनी चाहिए। कैमरों के लिए पर्याप्त पावर बैकअप की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि बिजली बाधित होने की स्थिति में रिकॉर्डिंग प्रभावित न हो। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए तकनीकी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाना जरूरी है।

550 थानों के CCTV नेटवर्क के लिए 102.10 करोड़

सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव की ओर से पेश शपथ पत्र में बताया गया कि CCTV निगरानी व्यवस्था के लिए राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियां गठित की गई हैं। इसके अलावा केंद्र की पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 102.10 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

इस राशि से प्रदेश के 550 पुलिस थानों के CCTV नेटवर्क और 31 जिला डैशबोर्ड को अपग्रेड किया जा रहा है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद अब पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था को केवल निगरानी का माध्यम नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के संरक्षण की व्यवस्था के रूप में और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर रहेगा।