संवाददाता/सौरभ साहू 

दिनांक,8/10/2026,

लोकेशन, सूरजपुर छत्तीसगढ़।।


सूरजपुर/दिनांक 8 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के सबसे हाईप्रोफाइल केस में 

714 दिनों के लंबे इंतजार के बाद बहुचर्चित पुलिस परिवार हत्याकांड में अदालत ने सजा का ऐलान कर दिया है। प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या से जुड़े मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक अन्य दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।।

सूरजपुर के इस मामले ने अक्टूबर 2024 में पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। अदालत के फैसले के बाद मामले में न्यायिक कार्रवाई का एक अहम पड़ाव पूरा हुआ है।।


 अदालत ने किसे क्या सजा सुनाई? 


01 कुलदीप साहू 

 मुख्य आरोपी 

 मृत्युदंड 


02 फूल सिंह उर्फ रिंकू 

 मृत्युदंड 


03 चंद्रकांत चौधरी उर्फ (सीके)मृत्युदंड 


04 आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी 


 आजीवन कारावास 

13 अक्टूबर 2024 की रात ने दहला दिया था सूरजपुर 

यह दर्दनाक घटना दिनांक 13 अक्टूबर 2024 की रात की है। सूरजपुर में पदस्थ प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। मामले में यौन अपराध और पॉक्सो कानून से जुड़े आरोप भी शामिल थे। घटना के बाद जिले में भारी आक्रोश देखने को मिला था और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी थी।

28 सितंबर 2026 को फास्ट ट्रैक अदालत सूरजपुर ने कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके और आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को दोषी करार दिया था। अदालत ने 8 अक्टूबर को सजा सुनाने की तारीख तय की थी। अब तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।


  दो अन्य आरोपी दोषमुक्त 


मामले में दाखिल आरोपपत्र में छह आरोपियों के नाम थे। सूरजपुर जिले से हमारे संवाददाता को प्राप्त जानकारी अनुसार बता दें, कि, विचारण के दौरान साक्ष्यों के अभाव में सूरज साहू और निलकेश्वर साहू को दोषमुक्त कर दिया गया था।


 अब आगे क्या? 


मृत्युदंड के मामलों में कानून के अनुसार संबंधित उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा के संबंध में आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में आया यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक अहम पड़ाव है। इस मामले ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, गंभीर अपराधों की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया को लेकर पूरे क्षेत्र का ध्यान खींचा था।