बिलासपुर। एग्रीस्टैक फार्मर रजिस्ट्री में संयुक्त खाते के सह-खातेदारों के अलग-अलग पंजीयन की अनिवार्यता को लेकर किसानों की परेशानी आखिरकार दूर हो गई है। किसानों की समस्या सामने आने के बाद शासन ने नियम में बदलाव किया है। अब संयुक्त खाते में केवल लंबरदार का एग्रीस्टैक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। सह-खातेदारों को अलग से पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 5 अक्टूबर को इस संबंध में नया आदेश जारी किया है। विभाग के संयुक्त सचिव गजपाल सिंह सिकरवार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान उपार्जन के लिए संयुक्त खाते की स्थिति में केवल लंबरदार का एग्रीस्टैक पंजीयन आवश्यक होगा।
17 जिलों में लक्ष्य से 3.89 लाख अधिक किसान दायरे में
पुरानी व्यवस्था के कारण प्रदेश के 17 जिलों में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में करीब 3.89 लाख अधिक किसान पंजीयन के दायरे में आ रहे थे। संयुक्त खाते में प्रत्येक सह-खातेदार का अलग पंजीयन कराने के कारण किसानों को दस्तावेज, आधार सत्यापन और मोबाइल ओटीपी जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा था। अब लंबरदार के पंजीयन से किसानों को इस प्रक्रिया में बड़ी राहत मिलेगी।
परिवार की सहमति और बेटियों के नाम से भी आ रही थी परेशानी
संयुक्त खाते के सभी सदस्यों का अलग-अलग पंजीयन कराने में परिवार के सदस्यों की सहमति और उनकी मौजूदगी बड़ी समस्या बन रही थी। बी-1 और आधार रिकॉर्ड में परिवार के सभी सदस्यों के नाम सामने आते हैं। कई मामलों में परिवार के सदस्यों के बीच सहमति नहीं बन पाती थी। वहीं शादी के बाद बेटियों के दूसरे स्थान पर चले जाने से भी उनका पंजीयन अटक रहा था।
पंजीयन के लिए बी-1 और आधार के साथ संबंधित किसान का मोबाइल नंबर भी जरूरी था, ताकि ओटीपी के जरिए सत्यापन हो सके। इन वजहों से संयुक्त खातों के बड़ी संख्या में किसान फार्मर रजिस्ट्री से बाहर रह जा रहे थे।
जिले के 55% कृषि खसरे अब भी रजिस्ट्री से बाहर
जिले में कुल 10,74,223 कृषि खसरे हैं। इनमें से 5,95,725 खसरे अभी फार्मर रजिस्ट्री के लिए शेष हैं। यानी अब तक केवल 44.54% कृषि खसरों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो सकी है। जिले में कुल 1,63,708 किसानों का पंजीयन है, जबकि पीएम किसान योजना में 1,55,715 किसान पंजीकृत हैं। इनमें 2,042 किसानों का अब तक पंजीयन नहीं हो पाया है।
नियम में बदलाव से संयुक्त खाते वाले किसानों को अलग-अलग पंजीयन की प्रक्रिया से राहत मिलेगी और धान उपार्जन के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन की प्रक्रिया भी सरल होने की उम्मीद है।