तीन साल 10 महीने तक चला चर्चित हत्याकांड का मुकदमा, यूपी के शूटरों पर हत्या की सुपारी लेने का था आरोप; दिनदहाड़े गोलियों से छलनी कर दी गई थी संजू की कार

बिलासपुर। शहर के चर्चित कांग्रेस नेता और हिस्ट्रीशीटर प्राणनाथ उर्फ संजू त्रिपाठी हत्याकांड में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले के सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया गया संजू का सगा भाई कपिल त्रिपाठी भी शामिल है। पुलिस की जांच में कपिल को हत्या की साजिश रचने वाला मुख्य आरोपी बताया गया था। आरोपियों में उत्तर प्रदेश के वे शूटर भी शामिल थे, जिन्हें हत्या की सुपारी दिए जाने का आरोप था। अभियोजन पक्ष अदालत में हत्या की साजिश और आरोपियों की संलिप्तता संदेह से परे साबित नहीं कर सका। नतीजतन, इतने सनसनीखेज हत्याकांड के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।

संपत्ति विवाद में भाई ने ही रची थी हत्या की साजिश

संजू त्रिपाठी और उसके भाई कपिल त्रिपाठी के बीच लंबे समय से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों का नाम शहर के विवादित जमीनों के कारोबार में चर्चित था। विवादित जमीनों का सौदा कर लाखों रुपये कमाने वाले दोनों भाइयों के बीच संपत्ति को लेकर ऐसा टकराव हुआ कि मामला हत्या तक पहुंच गया। पुलिस की विवेचना के मुताबिक, कपिल त्रिपाठी ने अपने भाई संजू की हत्या की साजिश रची और उत्तर प्रदेश के शूटरों को सुपारी दी थी। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि कपिल ने अपने फार्म हाउस में तीन पिस्तौल और करीब 20 कारतूस रखे थे।

अलग-अलग गाड़ियों से पहुंचे थे शूटर

पुलिस की कहानी के मुताबिक, 14 दिसंबर 2022 को हत्याकांड को अंजाम देने के लिए आरोपी अलग-अलग गाड़ियों में कपिल त्रिपाठी के फार्म हाउस से सकरी बाईपास की ओर निकले थे। प्रसिन गुप्ता सफेद रंग की कार में था। उसके साथ भरत तिवारी, आशीष तिवारी और राजेंद्र ठाकुर सवार थे। वहीं, नीले रंग की पुरानी बलेनो कार विनय द्विवेदी उर्फ गुरुजी चला रहा था। इसमें उत्तर प्रदेश के शूटर दानिश, पप्पू दाढ़ी और एजाज उर्फ सोनू कट्टा हथियारों के साथ बैठे थे।

सभी आरोपी सकरी बाईपास पर संजू त्रिपाठी के आने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान दानिश को फोन पर सूचना मिली कि संजू सफेद रंग की एमजी हेक्टर कार से आने वाला है। शाम करीब 4:10 बजे जैसे ही संजू की कार वहां पहुंची, योजना के मुताबिक प्रसिन गुप्ता ने स्पीड ब्रेकर के आगे अपनी कार खड़ी कर उसका रास्ता रोक दिया।

कार घेरकर बरसाईं थीं गोलियां

संजू की गाड़ी रुकते ही बलेनो में सवार आरोपी बाहर निकल आए और उसकी कार को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस के मुताबिक, दानिश अंसारी ने ड्राइवर सीट पर बैठे संजू पर पहली गोली चलाई। इसके बाद एजाज उर्फ सोनू और दूसरी तरफ से पप्पू दाढ़ी तथा विनय द्विवेदी ने भी फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों से संजू की कार छलनी हो गई। फायरिंग के बाद दानिश ने साथियों को बताया कि संजू की मौत हो चुकी है। इसके बाद सभी आरोपी अलग-अलग गाड़ियों से उत्तर प्रदेश की ओर फरार हो गए।

14 दिसंबर 2022 को दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने पूरे बिलासपुर में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में कुल 22 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें कपिल त्रिपाठी को मुख्य साजिशकर्ता और उत्तर प्रदेश के शूटरों को सुपारी लेकर हत्या करने वाला बताया गया था।

पुलिस की कहानी और अदालत में सबूत के बीच रह गई दूरी

इस हत्याकांड में पुलिस ने जिस तरह हत्या की पूरी साजिश, हथियारों की व्यवस्था, शूटरों की भूमिका और वारदात को अंजाम देने का घटनाक्रम सामने रखा था, उससे मामला काफी चर्चित हुआ था। लेकिन अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। शुक्रवार को जिला न्यायालय ने सभी 22 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

इस फैसले ने बिलासपुर के सबसे चर्चित हत्याकांडों में शामिल इस मामले की पुलिस विवेचना और अभियोजन की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिनदहाड़े हुई हत्या, उत्तर प्रदेश से बुलाए गए शूटरों की कथित सुपारी और अपने ही भाई को रास्ते से हटाने की साजिश जैसी गंभीर कहानी के बावजूद सभी आरोपियों का बरी होना पुलिस और अभियोजन के लिए बड़ा झटका है।

नोट: उपलब्ध ऑनलाइन स्रोतों में मुझे 30 अक्टूबर के फैसले की प्रमाणित प्रति नहीं मिली है। इसलिए अदालत ने किन विशिष्ट साक्ष्यों या जांच संबंधी कमियों के आधार पर आरोपियों को बरी किया, उसका विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है। हत्याकांड की शुरुआती पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी से संबंधित पुराने समाचारों में भी वारदात का घटनाक्रम दर्ज है। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अगर इन लोगों ने संजू त्रिपाठी की हत्या नहीं की है तो फिर किसने की है क्योंकि संजू त्रिपाठी की हत्या तो हुई है।