
दूसरे दिन 75 और नर्सें आंदोलन में शामिल, संख्या बढ़कर 225 हुई; ग्रेड पे बढ़ाने और कलेक्टर दर पर काम करने वालों को संविदा में लेने की मांग
बिलासपुर। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। ग्रेड पे बढ़ाने और कलेक्टर दर पर काम कर रहीं नर्सों को संविदा सेवा में शामिल करने की मांग को लेकर लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी आंदोलन जारी रहा। पहले दिन करीब 150 नर्सें हड़ताल पर थीं, जबकि दूसरे दिन 75 और नर्सों के शामिल होने से इनकी संख्या बढ़कर 225 हो गई। अनुभवी और वरिष्ठ नर्सों की अनुपस्थिति में मरीजों की देखरेख की जिम्मेदारी जूनियर नर्सों और नए स्टाफ पर आ गई है। इससे आईसीयू, एआईसीयू, एमआईसीयू, कैजुअल्टी और सर्जरी विभाग में व्यवस्थाएं संभालने का दबाव बढ़ गया है।
हड़ताल के दौरान कुछ वार्डों में मरीजों की देखरेख और जरूरी प्रक्रियाओं को लेकर दिक्कतें सामने आईं। वरिष्ठ नर्सों के नहीं रहने से जूनियर स्टाफ को मरीजों की फाइल खोजने, दवाओं के चार्ट समझने और डॉक्टरों के राउंड के दौरान मरीजों की स्थिति से संबंधित सटीक जानकारी देने में परेशानी हुई। गंभीर मरीजों की देखभाल वाले विभागों में अनुभवी स्टाफ की कमी के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है। इस बीच डीन और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) ने अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
ओपीडी में पहुंचे 2,243 मरीज, व्यवस्था संभालने में जुटा प्रबंधन
हड़ताल के बीच मंगलवार को सिम्स की ओपीडी में कुल 2,243 मरीज पहुंचे। इनमें मेडिसिन विभाग में 517, स्किन विभाग में 347, नेत्र विभाग में 169 और सर्जरी विभाग में 179 मरीजों का पंजीयन हुआ। बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने के कारण अस्पताल के विभिन्न विभागों में नियमित सेवाएं जारी रखने की चुनौती बनी रही। प्रबंधन उपलब्ध स्टाफ के जरिए मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने में जुटा रहा।
सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि वरिष्ठ नर्सें ग्रेड पे बढ़ाने और कलेक्टर दर पर काम करने वाले स्टाफ को संविदा पर रखने की मांग को लेकर हड़ताल कर रही हैं। कुछ वार्डों में हल्की-फुल्की अव्यवस्था हुई है, लेकिन ऐसी स्थिति नहीं बनी कि मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़े या सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाएं। उन्होंने बताया कि नर्सों की मांगें शासन स्तर से संबंधित हैं और इस संबंध में जानकारी शासन को दे दी गई है।
8 साल से ग्रेड पे बढ़ाने की मांग, तीन बार हो चुका है आंदोलन
नर्सिंग संघ पिछले 8 वर्षों से ग्रेड पे 2400 से बढ़ाकर 2800 करने की मांग कर रहा है। आंदोलनरत नर्सों का कहना है कि इस दौरान कई बार हड़ताल और प्रदर्शन किए गए, लेकिन हर बार आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन स्थगित करना पड़ा। मांगों का निराकरण नहीं होने के कारण कर्मचारियों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
हाल ही में 10 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सिम्स दौरे के दौरान भी कर्मचारियों ने अपनी मांगों से उन्हें अवगत कराया था। इसके बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से नाराजगी बनी हुई है।
आज बाइक रैली के बाद तय होगी आंदोलन की दिशा
नर्सिंग संघ ने बुधवार को बाइक रैली और प्रदर्शन का कार्यक्रम प्रस्तावित किया है। संघ के प्रतिनिधियों के मुताबिक, इस प्रदर्शन के बाद आगे की रणनीति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में हड़ताल जारी रखने पर विचार किया जा सकता है। वहीं, समाधान निकलने पर आंदोलन समाप्त करने का फैसला भी लिया जा सकता है।
हड़ताल के दूसरे दिन आंदोलनकारियों की संख्या बढ़ने से सिम्स प्रबंधन के सामने स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। अब सभी की नजर शासन स्तर पर होने वाली पहल और नर्सिंग संघ के अगले निर्णय पर टिकी है।