लिफ्ट ठप होने से मरीजों को चढ़नी पड़ी सीढ़ियां, अंधेरे में मोबाइल की रोशनी से बांटी दवाइयां; 200 से अधिक मरीजों की जांच और इलाज प्रभावित
बिलासपुर। दशहरा से पहले बिजली विभाग के रखरखाव कार्य का खामियाजा गुरुवार को संभाग के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को भुगतना पड़ा। सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक करीब ढाई घंटे बिजली आपूर्ति बंद रहने से अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गईं। एमआरआई, सीटी स्कैन और सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवाएं प्रभावित हुईं। अस्पताल की सभी लिफ्ट बंद हो गईं, वहीं दवा वितरण केंद्र में अंधेरा छा गया। कर्मचारियों को मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट की रोशनी में मरीजों को दवाइयां बांटनी पड़ीं। वाटर पंप बंद होने से कई वार्डों में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित रही।
बिजली बंद रहने के कारण दूर-दराज के गांवों से जांच कराने पहुंचे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कुछ मरीजों को बिना जांच कराए ही लौटना पड़ा। सीटी स्कैन, सोनोग्राफी और एक्स-रे सहित विभिन्न जांच सेवाओं से जुड़े 200 से अधिक मरीजों के कामकाज और इलाज पर असर पड़ा। सिम्स में रोजाना करीब 2 हजार मरीज इलाज, जांच और भर्ती के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति बंद होने से बड़ी संख्या में मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दवा वितरण केंद्र में मोबाइल की रोशनी का सहारा
बिजली आपूर्ति बंद होते ही सिम्स के दवा वितरण केंद्र में अंधेरा छा गया। यहां दवा लेने पहुंचे मरीजों की लंबी कतार लगी थी। बिजली नहीं होने से कर्मचारियों को मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर काम करना पड़ा। पर्चियां देखने और दवाइयों का वितरण करने में भी परेशानी हुई। अस्पताल जैसी आवश्यक सेवा वाले संस्थान में दवा वितरण के दौरान वैकल्पिक रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को असुविधा हुई।
लिफ्ट बंद, बुजुर्ग और गंभीर मरीज परेशान
पावर कट का असर अस्पताल की आवाजाही व्यवस्था पर भी पड़ा। बिजली बंद होते ही सभी लिफ्ट ठप हो गईं। इसके कारण बुजुर्गों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को ओपीडी तथा डॉक्टरों के कक्षों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ा। परिजनों को मरीजों को सहारा देकर ऊपर-नीचे ले जाना पड़ा। अस्पताल में लिफ्ट बंद होने के दौरान मरीजों की सुविधा के लिए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई।
44 वार्डों में से 10 में जनरेटर कनेक्शन नहीं
सिम्स में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अस्पताल के कुल 44 वार्डों में से 10 वार्डों में अब तक जनरेटर लाइन की कनेक्टिविटी नहीं हो पाई है। अस्पताल में वर्तमान में 9 डीजल जनरेटर उपलब्ध हैं, लेकिन सभी वार्डों को इनसे बैकअप बिजली नहीं मिल पाती।
जनरेटर की कनेक्टिविटी मुख्य रूप से इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और ओपीडी पर्ची काउंटर जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों में की गई है। इसके बावजूद अस्पताल के सभी हिस्सों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पाई है। ऐसे में बिजली विभाग के निर्धारित रखरखाव कार्य के दौरान भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
17 सितंबर को भी तीन घंटे बंद रही थी बिजली
सिम्स में बिजली आपूर्ति बंद होने से मरीजों को परेशानी का सामना करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 17 सितंबर को भी सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक करीब तीन घंटे बिजली बंद रही थी। इसके बावजूद अस्पताल की वैकल्पिक बिजली व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। गुरुवार को दोबारा बिजली बंद होने से जांच सेवाएं, लिफ्ट और पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई।
नए फीडर के लिए जमा किए 30 लाख रुपए
अस्पताल में बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए बिजली विभाग के पास नए डेडिकेटेड फीडर के लिए 30 लाख रुपए जमा किए जा चुके हैं। दूसरा फीडर शुरू होने के बाद सिम्स को डबल-फीडर व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे एक बिजली लाइन में तकनीकी खराबी आने पर दूसरी लाइन से आपूर्ति बहाल करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा अस्पताल परिसर में बड़े पैमाने पर सोलर पैनल लगाने की तैयारी भी की जा रही है। इसका उद्देश्य बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम करने के साथ वैकल्पिक ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि, नई व्यवस्था शुरू होने तक अस्पताल में बिजली बंद रहने की स्थिति में मरीजों को होने वाली परेशानी दूर करना चुनौती बना हुआ है।
नए फीडर पर जल्द शुरू होगा काम
सिम्स के एमएस डॉ. लखन सिंह ने बताया कि बिजली विभाग ने रखरखाव कार्य के लिए आपूर्ति बंद की थी, जिससे मरीजों को परेशानी हुई। नए फीडर पर जल्द काम शुरू किया जाएगा। अस्पताल में सोलर पैनल लगाने की व्यवस्था भी की जा रही है।