घटस्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का आगाज, 300 से अधिक स्थानों पर विराजेंगी माता; 16 मंदिरों में प्रज्वलित होंगी 39,093 ज्योतियां
बिलासपुर। शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू हो गया। घटस्थापना के साथ ही शहर के मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भक्तिमय माहौल बन गया है। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना, ज्योति कलश प्रज्वलन और माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। इस वर्ष शहर और आसपास के क्षेत्रों में 300 से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। वहीं, 16 मंदिरों में कुल 39,093 ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाएंगे।
नवरात्र की तैयारियों को लेकर शनिवार को मंदिरों में विशेष साफ-सफाई, रंगाई-पोताई और शुद्धिकरण किया गया। इसके लिए कई मंदिरों के पट शाम 4 बजे से बंद कर दिए गए थे। रात तक मंदिरों में शुद्धिकरण का कार्य चलता रहा। रविवार सुबह विशेष पूजा-अर्चना और माता के श्रृंगार के बाद मंदिरों के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले गए। दूसरी ओर, दुर्गा पंडालों में देर रात तक माता की प्रतिमाओं का आगमन होता रहा। ढोल-ताशे, आतिशबाजी और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने माता का स्वागत किया। नेहरू नगर में भी मां दुर्गा का भव्य आगमन हुआ।
हाथी पर सवार होकर आईं माता, सुख-समृद्धि की मान्यता
शारदीय नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के लिए सुबह 6:22 से 10:16 बजे तक मुख्य मुहूर्त रहा, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 बजे तक निर्धारित था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार से नवरात्र शुरू होने के कारण इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है। हाथी पर माता के आगमन को सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है।
सरकंडा स्थित पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य दिनेश महाराज के अनुसार, इस बार नवरात्र के दौरान ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति भी बनी हुई है। देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं और नवरात्र से लेकर दशहरे तक इसी स्थिति में रहेंगे। वहीं, 13 अक्टूबर को शुक्र अस्त होंगे। इस बार 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी का पूजन एक ही दिन होगा, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।
30 साल बाद शनि का शश राजयोग
आचार्य दिनेश महाराज ने बताया कि इस नवरात्र में शनि के कुंभ राशि में स्थित होने से शश राजयोग बनने का विशेष संयोग बताया जा रहा है। उनके अनुसार, शनि का अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में रहकर यह योग बनाना लगभग 30 साल बाद हुआ है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस योग को साधना में स्थिरता, न्यायप्रिय कार्यों और जनहित से जुड़े निर्णयों के लिए अनुकूल माना जाता है। देवगुरु बृहस्पति और सूर्य के बीच भी शुभ भावों में दृष्टि संबंध बन रहा है।
मंदिरों में विशेष पूजा, ज्योति कलश प्रज्वलित
नवरात्र के पहले दिन शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में विशेष अनुष्ठान शुरू हुए। मां महामाया मंदिर, तिफरा काली मंदिर, जरहाभाठा दुर्गा मंदिर, हरदेव लाल मंदिर, सरकंडा पीतांबरा पीठ, सतबहिनिया मंदिर, बैमा-नगोई महामाया मंदिर और चांटीडीह गायत्री मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में शुद्धिकरण के बाद पूजा-अर्चना की गई।
तिफरा काली मंदिर में सुबह 4 बजे से ही पूजा शुरू हो गई। अभिजीत मुहूर्त में मनोकामना ज्योति प्रज्वलित की गई। यहां 9 दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ और दुर्गा सप्तशती का पाठ होगा। ज्योति कलश की व्यवस्था के लिए 50 लोगों की टीम लगाई गई है, जबकि 50 स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने में सहयोग करेंगे।
सरकंडा स्थित पीतांबरा पीठ में 108 मनोकामना घृत ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाएंगे। यहां नवरात्र के दौरान मां बगलामुखी के विभिन्न स्वरूपों का पूजन होगा। वहीं, तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर में 11 से 19 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे महाआरती होगी। 19 अक्टूबर को गरबा का आयोजन भी किया जाएगा।
रामलीला, दशहरा और अरपा महाआरती के आयोजन
नवरात्र के साथ शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की भी शुरुआत हो गई है। रेलवे परिक्षेत्र में 76वां रामलीला एवं दशहरा उत्सव 11 से 20 अक्टूबर तक आयोजित होगा। रामलीला भवन में प्रतिदिन रात 7 बजे से 10:30 बजे तक रामलीला का मंचन किया जाएगा। 20 अक्टूबर को रावण दहन होगा।
वहीं, 11 अक्टूबर को शाम 5 बजे रिवर व्यू रोड पर अरपा महाआरती का आयोजन किया जाएगा। सरजू बगीचा रोड स्थित मेडिटेशन हॉल में भी 9 दिनों तक शाम 4:30 बजे से निशुल्क सामूहिक दुर्गा सप्तशती साधना होगी। आयोजक पुनीत ढंढारिया के अनुसार, डेढ़ घंटे के इस आयोजन में 701 मंत्रों का जप, मां काली, लक्ष्मी और सरस्वती का पाठ तथा आरती की जाएगी।
महालया के अवसर पर मूर्तिकारों ने प्रतिमाओं के चक्षुदान की परंपरा भी निभाई। ग्राम मोहरा में स्थापित होने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा का चक्षुदान किया गया। इसके साथ ही शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति उपासना, पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया है।