सीवेज रोकने की योजना बनाने में ही लगेंगे 6 महीने, काम पूरा होने में 2 साल और; हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने पेश किया शपथपत्र

बिलासपुर। अरपा नदी में शहर के नालों से पहुंच रहे सीवेज को रोकने के मामले में राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में शपथपत्र पेश किया है। इसमें बताया गया है कि बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र में कुल 70 नाले हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 8 नाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़े हैं। बाकी 62 नालों का गंदा पानी फिलहाल सीधे अरपा नदी में पहुंच रहा है। इन नालों के सीवेज को रोकने, मोड़ने और उपचार की व्यवस्था तैयार करने के लिए तकनीकी योजना बनाने में ही कम से कम 6 महीने लगेंगे। इसके बाद काम पूरा करने में करीब 2 साल और लगने का अनुमान है।

चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच में पेश शपथपत्र में मुख्य सचिव विकास शील की ओर से बताया गया कि अरपा के उत्तर दिशा के 4 नाले कोनी के 6 एमएलडी एसटीपी से जुड़े हैं। दक्षिण दिशा के 2 नाले मंगला के 6 एमएलडी एसटीपी से जुड़े हैं। वहीं दक्षिण दिशा के 2 अन्य नालों को मंगला के 10 एमएलडी एसटीपी से जोड़ा गया है। यह संयंत्र निर्माण के अंतिम चरण में है और दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

31 नाले उत्तर, 31 दक्षिण दिशा में

शेष 62 नालों में 31 अरपा के उत्तर और 31 दक्षिण दिशा में हैं। इन सभी नालों से निकलने वाला सीवेज फिलहाल बिना उपचार सीधे अरपा नदी में जा रहा है। यानी शहर के सीवेज का बड़ा हिस्सा अभी एसटीपी तक पहुंच ही नहीं रहा है।

पहले सर्वे और तकनीकी आकलन, फिर बनेगी योजना

सरकार ने बताया कि 62 नालों के सीवेज को रोकने और एसटीपी तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार करने से पहले विस्तृत तकनीकी आकलन किया जाएगा। इसमें मौजूदा सीवेज व्यवस्था की स्थिति, नालों को रोकने और मोड़ने की जरूरत तथा इसके लिए जरूरी तकनीकी प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में कम से कम 6 महीने लगेंगे।

इसके बाद तैयार प्रस्तावों की सक्षम अधिकारियों द्वारा समीक्षा की जाएगी। इसमें एसटीपी की प्रस्तावित क्षमता, तकनीकी व्यवहार्यता और पूरी योजना की उपयोगिता का आकलन होगा। स्वीकृति मिलने के बाद ही सीवेज रोकने और उपचार की व्यवस्था पर काम शुरू किया जाएगा।

2019 की जनहित याचिका पर मांगा गया था 70 नालों का ब्योरा

हाई कोर्ट के 31 अगस्त 2026 के आदेश के पालन में मुख्य सचिव की ओर से यह शपथपत्र पेश किया गया है। एडवोकेट अरविंद कुमार शुक्ला समेत अन्य ने वर्ष 2019 में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें अरपा के उद्गम के संरक्षण-संवर्धन के साथ बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के नालों से निकलने वाले सीवेज को रोकने, मोड़ने और उसके उपचार की व्यवस्था का मुद्दा उठाया गया था। हाई कोर्ट ने सरकार से शहर के 70 नालों की स्थिति और उनके सीवेज प्रबंधन की जानकारी मांगी थी।

उद्गम से 2 किमी बहाव क्षेत्र संरक्षित करने की मांग

सोमवार को सुनवाई के दौरान अरपा के उद्गम क्षेत्र को लेकर भी याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग रखी गई। बताया गया कि उद्गम से करीब 700 मीटर आगे से खेती शुरू हो जाती है। इस पर याचिकाकर्ताओं ने उद्गम से 700 मीटर चौड़े और 2 किमी लंबे बहाव क्षेत्र को संरक्षित करने की मांग की। मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।