बिलासपुर सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में शारदीय नवरात्र महोत्सव 11 से 19 अक्टूबर 2026 तक श्रद्धा एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप मनाया जा रहा है।महोत्सव का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर को ध्वजारोहण, ज्वारारोपण एवं श्री मनोकामना अखंड घृत ज्योति कलश प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर मंदिर में 125 मनोकामना घृत ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए गए। नवरात्र के पावन पर्व पर चौथे दिन कुष्मांडा देवी के रूप में माँ बगलामुखी देवी का पूजन किया गया। प्रतिदिन श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, श्री महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती देवी का श्रीसूक्त एवं षोडश मंत्रों द्वारा दूधधारा सहित अभिषेक तथा भगवान श्रीरामचंद्र जी एवं श्री सिद्धिविनायक गणेश जी का पूजन-श्रृंगार किया जा रहा हैं।
पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन माँ दुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता देवी के रूप में मां श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन किया जाएगा, भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद के नाम से भी जाना जाता है, की माता होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता पड़ा। माँ का स्वरूप अत्यंत ममतामयी, करुणामयी और भक्तों को सुख-शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। वे अपने एक हाथ में भगवान स्कंद को गोद में धारण करती हैं तथा अन्य हाथों में कमल पुष्प सुशोभित रहते हैं। कमल पर विराजमान होने के कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
माँ स्कंदमाता की आराधना से संतान सुख, संतान की उन्नति, परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। देवी अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली तथा संकटों से रक्षा करने वाली मानी जाती हैं। उनकी उपासना से मन में ममता, धैर्य, करुणा और आत्मविश्वास जैसे गुणों का विकास होता है। आध्यात्मिक मान्यता है कि माँ स्कंदमाता की कृपा से भक्तों को सांसारिक सुखों के साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्राप्त होता है।
प्रेम, करुणा, त्याग और संस्कारों के माध्यम से परिवार एवं समाज को सशक्त बनाया जा सकता है। उनकी आराधना केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि मातृत्व, वात्सल्य और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है। नवरात्र का यह पावन अवसर श्रद्धालुओं को भक्ति, सदाचार और सकारात्मक जीवन-दृष्टि अपनाने की प्रेरणा देता है।