आपत्ति नहीं तो घर बैठे मिलेगी रिपोर्ट, समयसीमा 3 महीने से घटाकर 1 माह

बिलासपुर। प्रदेश के सभी 33 जिलों में सीमांकन की प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी। आवेदक च्वाइस सेंटर (सीएससी) से आवेदन दर्ज करा सकेंगे। आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में पहुंचेगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट समेत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। आपत्ति नहीं होने पर आवेदक को तहसील जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और सीमांकन रिपोर्ट भी ऑनलाइन मिल जाएगी। आपत्ति होने पर ही संबंधित तहसील कार्यालय जाना होगा।

अब तक सीमांकन के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन देना पड़ता था। इसके बाद पटवारी और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट, संबंधित पक्षों को सूचना और बयान जैसी प्रक्रियाओं के कारण मामले लंबे समय तक लंबित रहते थे। नई व्यवस्था में आवेदन से रिपोर्ट जारी होने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होने से आवेदक को बार-बार तहसील जाने और आवेदन की स्थिति पता करने की जरूरत नहीं होगी।

राजस्व मामलों में तीसरा बड़ा बदलाव

सीमांकन से पहले रिकॉर्ड दुरुस्ती, नामांतरण और डायवर्सन की प्रक्रिया में भी बदलाव किए जा चुके हैं। रिकॉर्ड दुरुस्ती यानी धारा 115 के मामलों में तहसीलदारों को फिर अधिकार दिए गए हैं। नामांतरण में रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की व्यवस्था शुरू की गई है। वहीं डायवर्सन में आवेदन के 15 दिन के भीतर निर्णय नहीं होने पर स्वतः डायवर्सन का प्रावधान किया गया है।

जिले में 97 मामले तय समय से बाहर

बिलासपुर जिले में सीमांकन के 206 मामले लंबित हैं। इनमें 109 मामले तीन महीने के, 38 मामले तीन से छह महीने, 29 मामले छह महीने से एक साल और 30 मामले एक साल से अधिक पुराने हैं। यानी 97 मामले तीन महीने की पुरानी तय समयसीमा से बाहर हैं।

सरकार ने अब सीमांकन के मामलों के निराकरण की समयसीमा तीन महीने से घटाकर एक माह कर दी है। ऐसे में ऑनलाइन आवेदन के साथ समय पर निराकरण सुनिश्चित करना विभाग के सामने बड़ी चुनौती होगी।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था आम लोगों के लिए सुविधाजनक होगी। आवेदक सीएससी से आवेदन दर्ज करा सकेंगे और इससे सीमांकन के मामलों के जल्द निराकरण में मदद मिलेगी।