रायपुर। साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए राहत की खबर है। ठगी की रकम यदि समय रहते ठगों के बैंक खाते में होल्ड करा दी गई है, तो उसे वापस पाने की प्रक्रिया अब आसान हो गई है। केंद्र की नई गाइडलाइन के बाद छत्तीसगढ़ में भी होल्ड रकम लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खास तौर पर 50 हजार रुपए तक की होल्ड राशि वापस लेने के लिए पीड़ित को एफआईआर या कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं होगी।

साइबर ठगी होते ही पीड़ित को तत्काल 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जा रही है। समय पर शिकायत होने पर पुलिस और संबंधित एजेंसियां ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोककर संबंधित खाते में होल्ड करा सकती हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पीड़ित को रकम वापस दिलाई जा सकती है।

50 हजार तक की रकम के लिए FIR जरूरी नहीं

नई व्यवस्था के तहत यदि साइबर ठगी की 50 हजार रुपए तक की राशि किसी खाते में फ्रीज या होल्ड हो गई है, तो उसे वापस लेने के लिए पीड़ित को एफआईआर या अदालत के रिफंड आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। पुलिस पीड़ित से क्षतिपूर्ति बॉन्ड भरवाकर रकम वापस करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

रायपुर में फिलहाल इसके लिए 100 रुपए का क्षतिपूर्ति बॉन्ड लिया जा रहा है। हालांकि स्पष्ट निर्देशों के अभाव में अलग-अलग स्थानों पर बॉन्ड की राशि अलग हो सकती है। जानकारी के अनुसार, इंडियन स्टाम्प एक्ट-1899 के तहत क्षतिपूर्ति बॉन्ड के लिए 1000 रुपए तक की स्टाम्प ड्यूटी का प्रावधान है। दूसरे राज्यों में भी अलग-अलग राशि का बॉन्ड लिया जा रहा है।

इसलिए लिया जा रहा क्षतिपूर्ति बॉन्ड

रकम वापस करने के बाद यदि कोई अन्य व्यक्ति उस राशि पर दावा करता है या अदालत किसी वैधानिक कारण से रकम वापस करने का आदेश देती है, तो संबंधित पीड़ित इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य होगा। इसी वजह से रकम लौटाने से पहले पीड़ित से क्षतिपूर्ति बॉन्ड लिया जा रहा है।

50 हजार से ज्यादा पर FIR जरूरी

यदि किसी एक खाते में साइबर ठगी की 50 हजार रुपए से अधिक राशि होल्ड है, तो इस मामले में एफआईआर की प्रक्रिया जरूरी होगी। मनी रेस्टोरेशन सिटीजन पोर्टल पर रिक्वेस्ट के बाद पुलिस द्वारा आवश्यक दस्तावेज और क्षतिपूर्ति बॉन्ड की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। सत्यापन के बाद होल्ड रकम वापस दिलाई जाएगी।

ऐसे करें होल्ड रकम वापस पाने के लिए आवेदन

पीड़ित मनी रेस्टोरेशन सिटीजन पोर्टल पर जाकर अपनी होल्ड रकम की जानकारी देख सकता है। इसके लिए एक्नॉलेजमेंट नंबर या ओटीपी के माध्यम से लॉगइन करना होगा। पोर्टल पर यह जानकारी मिल सकेगी कि किस बैंक खाते में उसकी कितनी रकम होल्ड है।

इसके बाद आवश्यकतानुसार बैंक संबंधी जानकारी, आईएफएससी कोड, धोखाधड़ी की राशि का विवरण, पैन कार्ड तथा एफआईआर या कोर्ट के आदेश से संबंधित दस्तावेज अपलोड करने होंगे। इसके बाद 'Raise Request For Refund' विकल्प के जरिए रिफंड रिक्वेस्ट दर्ज की जा सकेगी। रिक्वेस्ट के बाद यूनिक आईडी नंबर जनरेट होगा और मामला जांच अधिकारी तक पहुंचेगा।

जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पीड़ित से क्षतिपूर्ति बॉन्ड लिया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर होल्ड की गई राशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस की जाएगी।

सबसे जरूरी बात: साइबर ठगी का शिकार होने पर देरी न करें। तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि रकम जितनी जल्दी होल्ड होगी, उसे वापस पाने की संभावना उतनी ही बेहतर रहती है।