जीपीएम जिले के बहुचर्चित राघवेंद्र पटेल हत्याकांड में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं एक अन्य आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया। मामले का मुख्य आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने आरोपी ऋषि रैदास और रविशंकर श्रीवास्तव को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य नष्ट करने का दोषी करार दिया। अदालत ने दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 120-बी के तहत आजीवन कारावास तथा अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं धारा 201/34 के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई गई है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जून 2021 में मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम उजवनडांड में आरोपियों ने पूर्व परिचित राघवेंद्र पटेल की आपसी साजिश के तहत गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव पर पेट्रोल डालकर उसे जला दिया गया था।
पुलिस जांच के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। अदालत ने गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
मामले में आरोपी संतोष चौधरी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि एक अन्य आरोपी काजल कुमार मन्ना अब भी फरार है। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।