बिलासपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर नगर निगम और पुलिस प्रशासन की दो साल की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है। लखनऊ में हाल ही में कोचिंग सेंटर में हुई आगजनी की घटना के बाद प्रशासन की नींद खुली और मंगलवार को संयुक्त टीम ने शहर के छह कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान गंभीर खामियां मिलने पर उड़ान एकेडमी को सील कर दिया गया, जबकि पांच अन्य संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
निरीक्षण में पाया गया कि उड़ान एकेडमी में अग्निशमन प्रणाली, फायर सेफ्टी लाइसेंस और लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। चार मंजिला भवन में आपातकालीन निकास की व्यवस्था भी नहीं मिली। एंट्री और एग्जिट के लिए केवल एक ही गेट था, जबकि लगभग 700 विद्यार्थियों के अनुपात में पर्याप्त जगह और पार्किंग की भी कमी पाई गई। इन गंभीर खामियों के चलते निगम ने संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
नगर निगम की टीम ने चंद्रा एकेडमी, ऑक्सीडेशन कोचिंग, पटेल ट्यूटोरियल समेत अन्य संस्थानों की भी जांच की। कई जगह फायर सेफ्टी उपकरणों, भवन अनुज्ञा और आपातकालीन निकासी व्यवस्था में कमियां सामने आईं। संबंधित संस्थानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार के निर्देश देते हुए नोटिस जारी किए गए हैं।
शहर में लगभग 80 कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी नहीं होने से छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच अभियान केवल बड़े हादसों के बाद शुरू होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना के बाद भी बिलासपुर में व्यापक जांच अभियान चलाया गया था। उस दौरान पार्किंग, फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास की कमी मिलने पर कंपीटिशन लाइब्रेरी और कम्युनिटी एकेडमी सहित चार संस्थानों को सील किया गया था। हालांकि कुछ समय बाद यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया और नियमित निरीक्षण नहीं किए गए।
संपदा अधिकारी अंकुर पांडेय ने बताया कि उड़ान एकेडमी में फायर सेफ्टी लाइसेंस, अग्निशमन प्रणाली और अन्य आवश्यक सुविधाओं का अभाव पाया गया। वहीं अन्य संस्थानों में भी विभिन्न प्रकार की कमियां मिली हैं, जिन्हें दूर करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। निर्धारित समय में सुधार नहीं होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन सुरक्षा मानकों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेगा या फिर हर बार किसी बड़े हादसे के बाद ही जांच और कार्रवाई का सिलसिला शुरू होगा। शहर के हजारों छात्र प्रतिदिन कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी में पहुंचते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर निरंतर निगरानी और सख्त अमल की आवश्यकता महसूस की जा रही है।