शशि मिश्रा

रतनपुर। रतनपुर क्षेत्र में साध्वी पद्मनीपुरी राठौर और नगर पंचायत अध्यक्ष लवकुश कश्यप के बीच चल रहा विवाद अब सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और अपने-अपने पक्ष में बयान जारी किए हैं। मामले की सत्यता फिलहाल जांच का विषय बनी हुई है।
सोमवार को साध्वी पद्मनीपुरी राठौर ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि 3 जून 2026 को ग्राम फुलवारी स्थित भयहरण हनुमान मंदिर आश्रम (चपोरा रोड) में आयोजित दयाराम दास के मृत्यु भोज कार्यक्रम के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष लवकुश कश्यप ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया। साध्वी ने आरोप लगाया कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया तथा पूर्व में भी उनके साथ गाली-गलौज और दुर्व्यवहार की घटनाएं हुई हैं, जिसकी शिकायत उन्होंने थाने में की थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम चपोरा के पूर्व सरपंच द्वारा उनके आश्रम में पहुंचकर निर्माण कार्य को नुकसान पहुंचाया गया, जो कथित रूप से नगर पंचायत अध्यक्ष के कहने पर किया गया था।
वहीं मंगलवार को नगर पंचायत अध्यक्ष लवकुश कश्यप और उनके समर्थकों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए अपना पक्ष सामने रखा। कश्यप ने जारी बयान में कहा कि 3 जून को भयहरण हनुमान मंदिर आश्रम में दयाराम दास की षोडशी कार्यक्रम आयोजित था, जिसमें विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों से साधु-संत शामिल हुए थे। उनके अनुसार साध्वी पद्मनीपुरी बिना आमंत्रण के कार्यक्रम में पहुंची थीं और सामान्य चर्चा के दौरान अचानक पुरानी बातों को लेकर विवाद करने लगीं तथा उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने लगीं।

लवकुश कश्यप ने दावा किया कि पूरे विवाद की जड़ आश्रम की महंत नियुक्ति से जुड़ी है। उनके अनुसार दयाराम दास के महानिर्वाण के बाद साध्वी पद्मनीपुरी अपनी पसंद के व्यक्ति को महंत बनाना चाहती हैं, जबकि वे किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर देखना चाहते हैं। इसी मतभेद के कारण विवाद उत्पन्न हुआ, जिसे अब अलग स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

कश्यप ने यह भी कहा कि षोडशी कार्यक्रम के दौरान अमरकंटक, गिरजाबंद हनुमान मंदिर, बिलासपुर, कोरबा सहित विभिन्न आश्रमों के साधु-संत मौजूद थे, जो पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी हैं।
इधर साध्वी पद्मनीपुरी अपने आरोपों पर कायम हैं और उन्होंने नगर पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। वहीं अध्यक्ष पक्ष आरोपों को निराधार बताते हुए इसे व्यक्तिगत एवं आश्रम प्रबंधन से जुड़े विवाद का परिणाम बता रहा है।
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच अब यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल प्रशासन अथवा पुलिस की ओर से मामले में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोप-प्रत्यारोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।