आकाश दत्त मिश्रा

मुंगेली। शहर में लगातार गिरते भू-जल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच एंड्रूज वार्ड क्रमांक 19 के युवा पार्षद रोशन सोनी ने एक बार फिर जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाते हुए वर्षों पुराने एक सार्वजनिक तालाब के पुनर्जीवन की मांग जिला कलेक्टर से की है। इस मांग के बाद न केवल जल संरक्षण का विषय चर्चा में आ गया है, बल्कि वर्षों से विवादों में रहे उक्त तालाब का मामला भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
रोशन सोनी ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन में बताया कि बिलासपुर रोड स्थित राज प्रॉपर्टी के सामने दाऊपारा क्षेत्र का एक सार्वजनिक तालाब वर्षों पहले भूमाफियाओं एवं कथित प्रॉपर्टी डीलर समूह द्वारा पाट दिया गया था। आरोप है कि तालाब की जमीन को समतल कर वहां प्लॉटिंग की तैयारी की गई। हालांकि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद आगे की प्रक्रिया रुक गई, लेकिन तालाब आज तक अपने मूल स्वरूप में वापस नहीं आ सका।
पार्षद ने मांग की है कि उक्त स्थल की पुनः खुदाई कर उसे तालाब के रूप में विकसित किया जाए, ताकि वर्षा जल का संचयन हो सके और शहर के लगातार गिरते भू-जल स्तर में सुधार लाया जा सके। उन्होंने कहा कि तालाबों का संरक्षण केवल जल संकट का समाधान नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी अत्यंत आवश्यक है।
रोशन सोनी इससे पहले भी आगर नदी की सफाई का मुद्दा जिला प्रशासन के समक्ष उठा चुके हैं, जिस पर प्रशासन ने सकारात्मक पहल करते हुए नगर पालिका के माध्यम से कार्य को स्वीकृति प्रदान की थी। अब तालाब पुनर्जीवन की मांग को भी शहर के दीर्घकालिक हितों से जोड़कर देखा जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, जिस भूमि पर प्लॉटिंग की तैयारी की गई थी, वहां कुछ लोगों से अग्रिम राशि भी ली गई है। बताया जा रहा है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण कई लोग लंबे समय से परेशान हैं और संबंधित पक्षों के चक्कर काट रहे हैं। चर्चा है कि अग्रिम राशि देने वालों में शहर के कुछ प्रतिष्ठित नागरिक, कारोबारी वर्ग तथा निजी अस्पतालों से जुड़े कुछ चिकित्सक भी शामिल हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला अवसर नहीं है जब इस तालाब का मुद्दा प्रशासन तक पहुंचा हो। पूर्व में भी कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। यही कारण है कि अब शहर में यह चर्चा होने लगी है कि पाटा गया यह तालाब मानो कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि ऐसा "बालि का पर्वत" बन गया है जिसके सामने कार्रवाई की हर कोशिश कमजोर पड़ जाती है।
हालांकि इस बार पार्षद रोशन सोनी की पहल के बाद जिला कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके प्रयासों की सराहना की है और शिकायत के आधार पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन के इस रुख को देखते हुए लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह मामला अब किसी निर्णायक मोड़ तक पहुंच सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि यदि तालाब का पुनर्जीवन होता है तो इससे न केवल भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि यह जल संरक्षण की दिशा में पूरे जिले के लिए एक मिसाल भी बनेगा। अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या वर्षों से पाटा गया यह तालाब एक बार फिर अपने अस्तित्व में लौट पाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाएगा।