नगरीय प्रशासन विभाग का बड़ा फैसला, पेड़ों के संरक्षण के लिए सभी निकायों को जारी किए निर्देश

बिलासपुर। शहरों में सड़क और फुटपाथ निर्माण के दौरान सीमेंट-कंक्रीट में जकड़े गए पेड़ों को अब राहत मिलने वाली है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्देश जारी करते हुए पेड़ों के तनों के चारों ओर एक मीटर तक बने सीमेंट-कंक्रीट ढांचे को हटाने तथा उन पर लगाए गए बोर्ड, तार, केबल और अन्य बाधाओं को तत्काल हटाने के आदेश दिए हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी पेड़ों के तनों से एक मीटर की परिधि के भीतर किसी प्रकार का निर्माण, मरम्मत या अन्य कार्य नहीं किया जाएगा। इसके अलावा पेड़ों पर लगाए गए विज्ञापन बोर्ड, साइन बोर्ड, बिजली और संचार संबंधी तार, केबल तथा अन्य सामग्री भी हटाई जाएगी। बड़े पेड़ों के आसपास लगाए गए ट्री गार्ड हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि पेड़ों को स्वाभाविक रूप से बढ़ने और फैलने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके।

जड़ों तक नहीं पहुंच पाता पानी और हवा

विभाग के अनुसार शहरी क्षेत्रों में सड़क चौड़ीकरण, फुटपाथ निर्माण और अन्य विकास कार्यों के दौरान कई स्थानों पर पेड़ों के तनों के आसपास सीमेंट और कंक्रीट बिछा दी जाती है। इससे पेड़ों की जड़ें पूरी तरह ढंक जाती हैं और मिट्टी तक हवा तथा पानी का पहुंचना बाधित हो जाता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में वर्षा का पानी भी सीधे जड़ों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे पेड़ों की वृद्धि प्रभावित होती है और लंबे समय में उनके सूखने का खतरा बढ़ जाता है।

पेंटिंग और नाम लिखने पर भी प्रतिबंध

नए निर्देशों में पेड़ों के तनों पर पेंट करने, खुरचकर नाम लिखने या किसी प्रकार की आकृति बनाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे पेड़ों की छाल को नुकसान पहुंचता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उनकी सेहत प्रभावित होती है।

निकायों को सौंपी गई जिम्मेदारी

नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगरीय निकायों को ऐसे स्थानों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पेड़ों के आसपास किए गए अनावश्यक निर्माण, लगाए गए बोर्ड और अन्य अवरोधों को हटाने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को सौंपी गई है। वहीं क्षेत्रीय कार्यालयों को इसकी नियमित निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बढ़ते शहरीकरण और घटती हरियाली के बीच विभाग का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ों के आसपास पर्याप्त खुली मिट्टी रहने से उनकी जड़ों को पर्याप्त हवा और पानी मिलेगा, जिससे उनकी आयु बढ़ेगी और शहरों में हरियाली का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।