सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा शरदोत्सव, चांदनी में रखी जाएगी खीर; 26 अक्टूबर को स्नान-दान और महर्षि वाल्मीकि जयंती
बिलासपुर। शरद पूर्णिमा पर रविवार, 25 अक्टूबर की रात शहर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, शृंगार और भजन-कीर्तन होंगे। श्रीकृष्ण और विष्णु मंदिरों में भगवान को सफेद वस्त्र, सफेद फूलों और मोतियों से सजाया जाएगा। कई मंदिरों में भगवान को गर्भगृह से बाहर श्वेत मंडप में विराजमान कराकर श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन कराए जाएंगे। रात में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा भी निभाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह तक रहने के कारण उस दिन स्नान-दान होगा। इसी दिन महर्षि वाल्मीकि जयंती भी मनाई जाएगी।
पंचांग के अनुसार, 25 अक्टूबर को सुबह 11:57 बजे चतुर्दशी तिथि समाप्त होकर 11:58 बजे पूर्णिमा शुरू होगी। पूर्णिमा तिथि 26 अक्टूबर को सुबह 9:42 बजे तक रहेगी। शरद पूर्णिमा का प्रमुख उत्सव रात में मनाए जाने के कारण रविवार की रात कोजागरी व्रत, मां लक्ष्मी और देवराज इंद्र की पूजा तथा शरदोत्सव आयोजित होंगे। 25 अक्टूबर की शाम 7:22 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होकर 26 अक्टूबर की सुबह 6:29 बजे तक रहेगा। इस दौरान रवि और हर्षण योग तथा रेवती नक्षत्र भी रहेंगे।
मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और महाआरती
शहर के घोंघा बाबा मंदिर, व्यंकटेश मंदिर, हरदेव लाल मंदिर, सदर बाजार स्थित लक्ष्मी-नारायण मंदिर, गायत्री मंदिर और पीतांबरा पीठ सहित अन्य मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे। मंदिरों में श्वेत श्रृंगार के साथ भगवान की पूजा-आरती की जाएगी और रास उत्सव भी आयोजित होंगे।
व्यंकटेश मंदिर में रविवार शाम 7:30 बजे भगवान को श्वेत मंडप में विराजमान कराया जाएगा। रात 8 बजे से भजन-कीर्तन शुरू होंगे और मध्यरात्रि 12 बजे महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा। घोंघा बाबा मंदिर में राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर के वार्षिकोत्सव के तहत शाम 4 बजे विशेष पूजा होगी। माता को सवामणी का भोग लगाया जाएगा। रात 8 से 11 बजे तक भजन-कीर्तन होंगे और मध्यरात्रि में दूध की खीर का प्रसाद बांटा जाएगा।
हरदेव लाल मंदिर में 50 लीटर दूध से खीर तैयार की जाएगी। पूजा-अर्चना के बाद रात 12 बजे श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित होगा। सदर बाजार स्थित लक्ष्मी मंदिर में मां लक्ष्मी का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन के बाद खीर का भोग लगाकर प्रसाद बांटा जाएगा।
50 साल से श्वास-दमा की औषधि का निशुल्क वितरण
शरद पूर्णिमा पर जुनी लाइन स्थित श्री लक्ष्मी औषधि भंडार (वैद्यनाथ दवाई दुकान), अग्रसेन भवन के पास, श्वास और दमा के मरीजों को रविवार, 25 अक्टूबर को निशुल्क आयुर्वेदिक औषधि वितरित की जाएगी। दुकान में पिछले 50 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। औषधि लेने के लिए बिलासपुर के अलावा अंबिकापुर, रायगढ़, कोरबा और शिवरीनारायण सहित दूरदराज के क्षेत्रों से भी मरीज पहुंचते हैं।
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नरेंद्र शर्मा के अनुसार, विशेष समय पर जड़ी-बूटियां एकत्र कर औषधि तैयार की जाती है। शरद पूर्णिमा की रात खीर के साथ इसका सेवन करने की परंपरा है। वे श्वास और दमा के मरीजों को लगातार 3 वर्षों तक औषधि सेवन की सलाह देते हैं। हालांकि, औषधि के लाभ और सेवन की अवधि के संबंध में योग्य चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। इसे निर्धारित इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
मां लक्ष्मी की पूजा और चांदनी में खीर रखने की परंपरा
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी भ्रमण करती हैं और पूछती हैं—‘कौन जाग रहा है?’ इसी मान्यता के चलते श्रद्धालु रात में जागकर मां लक्ष्मी और देवराज इंद्र की पूजा करते हैं। सुख-समृद्धि की कामना से दूध की खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखी जाती है। इसे अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है।