2006 के बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार को हरिद्वार में उसकी चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला। पुलिस के अनुसार, कोली के गले में फंदा था और रस्सी का दूसरा सिरा पंखे से बंधा मिला। आशंका जताई जा रही है कि वजन पड़ने से रस्सी टूट गई थी। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का रहने वाला सुरेंद्र कोली इसी महीने हरिद्वार आया था और उसने यहां चाय की दुकान किराए पर लेकर नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश की थी। करीब दो दशक तक जेल में रहने के बाद वह निठारी कांड से जुड़े सभी 13 मामलों में अदालत से बरी हो चुका था।

निठारी कांड दिसंबर 2006 में सामने आया था। नोएडा के सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर के डी-5 बंगले के पीछे और नालों से कंकाल और मानव हड्डियां बरामद होने के बाद मामला देशभर में चर्चित हुआ था। उस समय सुरेंद्र कोली पंधेर के घर में नौकर था। उसे निठारी से जुड़े 13 मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में सभी मामलों में वह बरी हो गया।

कानूनी आजादी के बाद भी नहीं छूटा निठारी का साया

सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद सुरेंद्र कोली जेल से बाहर तो आ गया, लेकिन सामान्य जिंदगी में लौटना उसके लिए आसान नहीं रहा। पिछले महीने जब वह अपने पैतृक गांव मंगरुखाल पहुंचा तो वहां उसका घर खंडहर हो चुका था और खेत बंजर पड़े थे। लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान उसका परिवार भी बिखर गया। पत्नी ने दूसरी शादी कर ली थी और मां की भी मृत्यु हो चुकी थी।

बताया जाता है कि गांव में पहचान उजागर होने और सामाजिक दूरी के कारण उसने वहां रहना उचित नहीं समझा और हरिद्वार चला गया। 7 सितंबर को वह सामाजिक कार्यकर्ता नारायण रावत से मिला था। दोनों ने साथ में सेल्फी भी ली थी, लेकिन कोली ने उसे सार्वजनिक नहीं करने को कहा था। उसका कहना था कि लोग उसे पहचान लेंगे।

रिहाई के बाद उसके वकील उसे चेन्नई भी ले गए थे, जहां वह कुछ समय एक कमरे में रहा। नारायण रावत से बातचीत में उसने कथित तौर पर कहा था कि उसे एक जेल से निकालकर दूसरी जेल में डाल दिया गया है। इसके कुछ ही समय बाद हरिद्वार में चाय की दुकान के भीतर उसकी मौत की खबर सामने आई।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है।