बिलासपुर। मगरपारा स्थित खसरा नंबर 15/1 की नजूल भूमि पर बिना रेरा की मंजूरी और नगर तथा ग्राम निवेश से लेआउट पास कराए प्लॉटिंग करने के मामले में प्रशासन ने सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। इस जमीन को 22 टुकड़ों में बांटकर प्लॉटिंग किए जाने की शिकायत के बाद अब प्रत्येक टुकड़े की जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि जमीन के बटांकन की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है या नहीं।


शुरुआती दो-तीन मामलों की जांच में सामने आया है कि संबंधित कॉलोनाइजर ने न तो रेरा से अनुमति ली और न ही नगर तथा ग्राम निवेश से लेआउट पास कराया। इसके बावजूद जमीन की प्लॉटिंग कर दी गई। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर नियमों के उल्लंघन की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।


शहर के बीच अवैध प्लॉटिंग से मचा हड़कंप


प्रशासन द्वारा अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ कार्रवाई के बीच शहर के बीचोंबीच बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग का मामला सामने आने से हड़कंप मचा है। मगरपारा के खसरा नंबर 15 पर जमीन को 22 टुकड़ों में बांटने और नजूल न्यायालय में नामांतरण कराने के प्रयास की जानकारी सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया है।


भू-स्वामी माया नागदौने व अन्य से संबंधित मामले में राजस्व अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच की जा रही है। फिलहाल नजूल न्यायालय ने संबंधित पक्षों को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का समय दिया है।


निगम सीमा में गांव शामिल होने के बाद सर्वे जरूरी


करीब पांच साल पहले शहर से लगे आसपास के गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल किया गया था। इसके बाद नए सिरे से सर्वे नहीं होने के कारण वर्तमान में नजूल की कुल कितनी जमीन मौजूद है, इसे लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में मगरपारा की जमीन के मामले के साथ ही नजूल भूमि के रिकॉर्ड और बटांकन की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


जवाब मिलने के बाद आगे बढ़ेगी जांच


नजूल अधिकारी नारायण गबेल ने बताया कि संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर निर्धारित समयसीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब मिलने के बाद ही आगे की वैधानिक प्रक्रिया और जांच बढ़ाई जाएगी। और लेआउट के बिना नहीं बेच सकेंगे 15/1 की जमीन, मगरपारा की नजूल भूमि के हर टुकड़े की होगी जांच


बिलासपुर। मगरपारा स्थित खसरा नंबर 15/1 की नजूल भूमि पर बिना रेरा की मंजूरी और नगर तथा ग्राम निवेश से लेआउट पास कराए प्लॉटिंग करने के मामले में प्रशासन ने सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। इस जमीन को 22 टुकड़ों में बांटकर प्लॉटिंग किए जाने की शिकायत के बाद अब प्रत्येक टुकड़े की जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि जमीन के बटांकन की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है या नहीं।

शुरुआती दो-तीन मामलों की जांच में सामने आया है कि संबंधित कॉलोनाइजर ने न तो रेरा से अनुमति ली और न ही नगर तथा ग्राम निवेश से लेआउट पास कराया। इसके बावजूद जमीन की प्लॉटिंग कर दी गई। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर नियमों के उल्लंघन की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

शहर के बीच अवैध प्लॉटिंग से मचा हड़कंप

प्रशासन द्वारा अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ कार्रवाई के बीच शहर के बीचोंबीच बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग का मामला सामने आने से हड़कंप मचा है। मगरपारा के खसरा नंबर 15 पर जमीन को 22 टुकड़ों में बांटने और नजूल न्यायालय में नामांतरण कराने के प्रयास की जानकारी सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया है।

भू-स्वामी माया नागदौने व अन्य से संबंधित मामले में राजस्व अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच की जा रही है। फिलहाल नजूल न्यायालय ने संबंधित पक्षों को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का समय दिया है।

निगम सीमा में गांव शामिल होने के बाद सर्वे जरूरी

करीब पांच साल पहले शहर से लगे आसपास के गांवों को नगर निगम सीमा में शामिल किया गया था। इसके बाद नए सिरे से सर्वे नहीं होने के कारण वर्तमान में नजूल की कुल कितनी जमीन मौजूद है, इसे लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में मगरपारा की जमीन के मामले के साथ ही नजूल भूमि के रिकॉर्ड और बटांकन की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जवाब मिलने के बाद आगे बढ़ेगी जांच

नजूल अधिकारी नारायण गबेल ने बताया कि संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर निर्धारित समयसीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब मिलने के बाद ही आगे की वैधानिक प्रक्रिया और जांच बढ़ाई जाएगी।