बिलासपुर सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में शारदीय नवरात्र महोत्सव 11 से 19 अक्टूबर 2026 तक श्रद्धा एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप मनाया जाएगा। महोत्सव का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर को ध्वजारोहण, ज्वारारोपण एवं श्री मनोकामना अखंड घृत ज्योति कलश प्रज्ज्वलन के साथ होगा। इस अवसर पर मंदिर में 108 मनोकामना घृत ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। कलश प्रज्ज्वलन अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:36 से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा।
पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन, श्रृंगार शैलपुत्री देवी के रूप मे किया जाएगा।, श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव, भगवान श्रीरामचंद्र जी, श्री गणेश जी, श्री भैरव जी एवं श्री हनुमान जी के दर्शन कर सकेंगे। नौ दिनों तक माँ बगलामुखी देवी का विशेष पूजन एवं श्रृंगार होगा। प्रतिदिन श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, श्री महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती देवी का श्रीसूक्त एवं षोडश मंत्रों द्वारा दूधधारा सहित अभिषेक तथा भगवान श्रीरामचंद्र जी एवं श्री सिद्धिविनायक गणेश जी का पूजन-श्रृंगार किया जाएगा।
प्रथम नवरात्र पर माँ शैलपुत्री की आराधना
नवरात्र के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। ‘शैल’ का अर्थ पर्वत है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री तथा पूर्वजन्म में माता सती थीं। वृषभ पर विराजमान माँ शैलपुत्री के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल सुशोभित है। उनका स्वरूप शक्ति, धैर्य एवं स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
आध्यात्मिक मान्यताओं में माँ शैलपुत्री की उपासना का संबंध मूलाधार चक्र से जोड़ा जाता है। इसे स्थिरता, सुरक्षा और जीवन के आधार का प्रतीक माना गया है। माँ की आराधना से आत्मविश्वास, मानसिक दृढ़ता एवं सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति की कामना की जाती है। प्रथम नवरात्र पर श्रद्धालु सुख-शांति, आरोग्य, समृद्धि एवं परिवार के कल्याण के लिए माँ शैलपुत्री से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
नवरात्र महोत्सव के दौरान मंदिर में देवी आराधना, वैदिक अनुष्ठानों एवं विशेष श्रृंगार से भक्तिमय वातावरण रहेगा।