मंगला के धुरीपारा स्कूल में तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों ने पहले बोर्ड से उतारे सवाल, फिर लिखे जवाब; विभाग के आदेश में ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखने का प्रावधान नहीं

बिलासपुर। जिले के सरकारी स्कूलों में तिमाही परीक्षा की व्यवस्था ने शिक्षा विभाग के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तिमाही परीक्षाएं 21 से 30 सितंबर तक आयोजित की जा रही हैं, लेकिन कई स्कूलों में बच्चों को प्रश्नपत्र तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। कहीं शिक्षक अपने स्तर पर प्रश्नपत्र प्रिंट करा रहे हैं तो कहीं बजट का हवाला देकर प्रश्न ब्लैकबोर्ड पर लिखकर परीक्षा ली जा रही है।

मंगला के धुरीपारा स्थित शासकीय स्कूल में तीसरी कक्षा की अंग्रेजी की तिमाही परीक्षा के दौरान बच्चे उत्तर पुस्तिकाएं लेकर बैठे थे, लेकिन उनके सामने प्रश्नपत्र नहीं था। शिक्षिका ब्लैकबोर्ड पर एक-एक कर सवाल लिख रही थीं। बच्चे पहले बोर्ड से सवाल अपनी कॉपियों में उतार रहे थे और इसके बाद उनके जवाब लिख रहे थे। स्कूल में दर्ज 19 विद्यार्थियों में से 16 परीक्षा में उपस्थित थे।

पड़ताल के दौरान शिक्षकों ने बताया कि पहली और दूसरी कक्षा के प्रश्नपत्र प्रधान पाठक प्रिंट कराने गए हैं, जबकि तीसरी, चौथी और पांचवीं कक्षा के प्रश्न पीडीएफ से देखकर ब्लैकबोर्ड पर लिखे जा रहे हैं। स्कूल की ओर से इसके पीछे बजट नहीं होने का हवाला दिया गया।

टिकरापारा में शिक्षकों ने खुद छपवाए प्रश्नपत्र

दूसरी ओर टिकरापारा (अहीरपारा) के प्राथमिक स्कूल में शिक्षकों ने अपने स्तर पर प्रश्नपत्र प्रिंट कराकर परीक्षा कराई। वहां बच्चों को सीधे प्रश्नपत्र दिए गए और परीक्षा सामान्य तरीके से संचालित की गई। बिल्हा, कोटा, तखतपुर और मस्तूरी के कई अन्य प्राथमिक स्कूलों में भी ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा कराने की जानकारी सामने आई है।

विभाग के आदेश में ब्लैकबोर्ड पर परीक्षा का उल्लेख नहीं

जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से 27 अगस्त को जारी आदेश के अनुसार विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रश्नपत्र तैयार कर उसकी सॉफ्ट कॉपी या पीडीएफ शाला प्रमुखों को उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद प्रधान पाठक स्थानीय स्तर पर प्रश्नपत्रों का प्रिंट निकालकर परीक्षा कराएंगे। आदेश में ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा कराने की व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद कई स्कूलों में इस तरीके से परीक्षा कराई जा रही है।

2.71 लाख बच्चे, 1088 प्राइमरी और 409 मिडिल स्कूल

जिले में 1088 प्राइमरी, 409 मिडिल, 102 हाईस्कूल और 124 हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं। इनमें करीब 2 लाख 71 हजार 200 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर पर प्रश्नपत्र तैयार कर प्रिंटआउट निकलवाए हैं, जबकि प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के लिए बीईओ कार्यालय से पीडीएफ के माध्यम से प्रश्नपत्र भेजे गए हैं।

डिजिटल शिक्षा के दावों के बीच बोर्ड से सवाल उतार रहे बच्चे

शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में स्मार्ट टीवी और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद परीक्षा के दौरान बच्चों को ब्लैकबोर्ड से सवाल उतारने पड़ रहे हैं। इससे परीक्षा का काफी समय सवाल लिखने में ही खर्च हो रहा है। छोटे बच्चों के लिए यह व्यवस्था उनकी परीक्षा प्रक्रिया को और कठिन बना रही है। साथ ही स्कूलों में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

“स्कूलों को जो निर्देश दिए गए हैं, उसके मुताबिक ही कार्य करना चाहिए। हर जिले में डीईओ की ओर से निर्देश दिए जाते हैं। वाट्सएप पर प्रश्नपत्रों के पीडीएफ भेजे जाने की जानकारी भी मिली थी।”

अश्वनी भारद्वाज, जॉइंट डायरेक्टर, स्कूल शिक्षा