विषय चयन में गलती और 200 रुपए विलंब शुल्क से नाराज थे विद्यार्थी, एबीवीपी के नेतृत्व में आधे घंटे चला प्रदर्शन

बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में परीक्षा फॉर्म में विषय चयन की गड़बड़ी और 200 रुपए विलंब शुल्क वसूले जाने के विरोध में मंगलवार को विद्यार्थियों ने घेराव कर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने मांग की कि विषय चयन की तकनीकी समस्या के कारण वे विलंब शुल्क देने के लिए बाध्य हुए हैं, इसलिए उनका विलंब शुल्क माफ किया जाए। विद्यार्थियों ने समाधान नहीं होने तक धरने पर बैठे रहने की बात कही। स्थिति को देखते हुए कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम भी छात्रों के साथ धरने पर बैठ गए। परीक्षा नियंत्रक डॉ. शरद कुमार देवांगन और विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग (यूटीटी) के विभागाध्यक्ष भी उनके साथ धरने पर बैठे। करीब आधे घंटे तक प्रदर्शन चला।

छह महीने पढ़ाया दूसरा विषय, फॉर्म में पुराना विषय दिखा

सत्र 2026-27 के प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के सामने परीक्षा फॉर्म भरते समय विषय चयन की समस्या आई। विद्यार्थियों के अनुसार, शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें छह महीने तक दूसरा विषय पढ़ाया गया, लेकिन ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म में पुराना विषय ही प्रदर्शित हो रहा था। इस वजह से छात्र सही विषय का चयन नहीं कर पा रहे थे। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय स्तर पर समय रहते समस्या का समाधान नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।

अवकाश के बाद विलंब शुल्क का बोझ

विश्वविद्यालय में 18 से 21 अक्टूबर तक अवकाश होने के कारण विषय चयन की समस्या का समाधान नहीं हो सका। 21 अक्टूबर को बिना विलंब शुल्क परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तारीख समाप्त हो गई। इसके बाद 22 अक्टूबर से विद्यार्थियों को फॉर्म भरने के लिए 200 रुपए विलंब शुल्क देना पड़ रहा था। इसी शुल्क को लेकर छात्रों में नाराजगी थी। उनका तर्क था कि जब विषय चयन में समस्या थी, तो उसका खामियाजा विद्यार्थियों से विलंब शुल्क लेकर नहीं वसूला जाना चाहिए।

छात्रों के साथ धरने पर बैठे कुलसचिव

कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम ने बताया कि परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन भरा जाना था और इसके लिए विश्वविद्यालय का खुला रहना आवश्यक नहीं था। जिन विद्यार्थियों को तकनीकी समस्या आ रही थी, उसका समाधान किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी सभी का विलंब शुल्क माफ करने की मांग पर अड़े थे और धरने पर बैठे रहने की बात कह रहे थे। ऐसे में वे स्वयं और अन्य अधिकारी भी छात्रों के साथ धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन करीब आधे घंटे तक चला।