बिलासपुर। पितृपक्ष शुरू होने से पहले ही शहर में पितरों की स्मृति में सेवा की एक अलग तस्वीर सामने आई है। दिवंगत माता-पिता और पूर्वजों की स्मृति में लोग वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों को भोजन करा रहे हैं। पुलिस लाइन स्थित कल्याण कुंज वृद्धाश्रम में तो पितृपक्ष के 15 दिनों के भोजन की बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है। करीब 70 परिवारों ने अलग-अलग तिथियों पर भोजन और नाश्ते की जिम्मेदारी ली है। जिन परिवारों को अपनी पसंद की तारीख नहीं मिल सकी, वे भी सेवा से पीछे नहीं हटे। उन्होंने वृद्धाश्रम में आटा, चावल, दाल, तेल, मसाले, बिस्किट, फल और अन्य जरूरी सामग्री दान करना शुरू कर दिया है।
कल्याण कुंज वृद्धाश्रम में 55 बुजुर्ग रहते हैं। यहां पूर्णिमा, प्रतिपदा, द्वितीया, पंचमी, द्वादशी और सर्व पितृ अमावस्या जैसी प्रमुख तिथियों पर एक ही दिन में तीन-तीन परिवारों ने भोजन और नाश्ते की सेवा की जिम्मेदारी ली है। कई परिवारों ने अपनी पसंद की तारीख करीब दो महीने पहले ही तय करा ली थी।
वृद्धाश्रम के अधीक्षक रंजन प्रधान के मुताबिक पिछले 5 वर्षों में पितृपक्ष के दौरान सेवा की यह परंपरा लगातार बढ़ी है। इन 15 दिनों में इतना राशन जुट जाता है कि कई बार 4 से 5 महीने तक वृद्धाश्रम की भोजन संबंधी जरूरतों में मदद मिलती है। भोजन कराने वाले परिवारों को बुजुर्गों की सेहत का ध्यान रखने की सलाह भी दी जाती है। उन्हें मीठा कम रखने और भोजन में तेल-मसाले का इस्तेमाल सीमित करने के लिए कहा जाता है।
नाश्ते की भी बुकिंग, कोई डोसा तो कोई इडली-सांभर खिला रहा
सेवा केवल दोपहर या शाम के भोजन तक सीमित नहीं है। कई परिवार सुबह के नाश्ते की जिम्मेदारी भी ले रहे हैं। कोई बुजुर्गों को डोसा खिला रहा है तो कोई इडली-सांभर। कुछ परिवार बड़ा, सैंडविच, फल और बिस्किट लेकर पहुंच रहे हैं। कई परिवार एक दिन के पूरे भोजन और नाश्ते का खर्च उठा रहे हैं। पितृपक्ष के दौरान सुबह और शाम भोजन कराने वाले परिवारों की तारीखें पहले से तय हैं। एक ही दिन में कई परिवारों की बुकिंग होने पर भोजन का समय और व्यवस्था पहले ही निर्धारित कर ली जाती है।
तारीख नहीं मिली तो राशन और कपड़े दान किए
भोजन कराने की मांग बढ़ने के कारण सभी परिवारों को अपनी पसंद की तारीख नहीं मिल सकी। इसके बाद कुछ परिवारों ने सेवा का तरीका बदल लिया। उन्होंने भोजन कराने के बजाय आटा, चावल, दाल, तेल और मसाले जैसी नियमित जरूरत की सामग्री वृद्धाश्रम को दे दी। कई परिवार फल, कपड़े, बिस्किट और अन्य उपयोगी सामग्री भी दान कर रहे हैं।
दूसरे वृद्धाश्रमों में नहीं दिखी ऐसी भीड़
शहर के सभी वृद्धाश्रमों में पितृपक्ष के दौरान सेवा की तस्वीर एक जैसी नहीं है। जोरापारा सरकंडा स्थित सुवाणी वृद्धाश्रम में करीब 25 बुजुर्ग रहते हैं। यहां पितृपक्ष में विशेष रूप से सेवा के लिए लोगों का संपर्क नहीं हुआ है। पूरे साल सेवा करने वाले लोग ही जरूरतें पूरी कर रहे हैं। वहीं माता की कुटिया वृद्धाश्रम में करीब 23 बुजुर्ग हैं। संचालिका नीतू दुबे के अनुसार यहां भी लोग बीच-बीच में सेवा के लिए आते हैं, लेकिन पितृपक्ष के लिए कोई विशेष बुकिंग नहीं हुई है।
अन्नदान के साथ बुजुर्गों को अपनापन देने की कोशिश
हिंदू परंपरा में पितृपक्ष के दौरान अन्नदान और जरूरतमंदों की सेवा को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम माना जाता है। इसी मान्यता के चलते कई परिवार अपने दिवंगत माता-पिता और पूर्वजों की स्मृति में वृद्धाश्रम, गौशाला, अनाथालय और जरूरतमंदों के बीच भोजन और राशन का वितरण करते हैं।
वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के साथ समय बिताना और उन्हें भोजन कराना इस सेवा को सामाजिक पहलू भी देता है। परिवार से दूर रह रहे बुजुर्गों को ऐसे अवसरों पर लोगों का साथ और अपनापन मिलता है।