बिलासपुर। पितृ पक्ष को लेकर समाज में लंबे समय से यह धारणा चली आ रही है कि इस अवधि में शुभ कार्य नहीं किए जाने चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार वर्मा ने इस मान्यता को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पितृ पक्ष को केवल अशुभ मानना उचित नहीं है। यह समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और स्मरण का विशेष अवसर है।
अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि उनके मन में भी यह सवाल था कि जब पितृ पक्ष में पूर्वजों के घर आने और उनकी पूजा-अर्चना की मान्यता है, तो इसी अवधि को शुभ कार्यों के लिए वर्जित क्यों माना जाता है। इस शंका के समाधान के लिए उन्होंने कर्मकांड के विद्वान स्वर्गीय पंडित रमाकांत मिश्र ‘शास्त्री’ से चर्चा की थी।
पंडित मिश्र के अनुसार पितृ पक्ष को केवल श्राद्ध पक्ष मानकर शुभ कार्यों के लिए अनुपयुक्त समझना उचित नहीं है। इस अवधि में भी विभिन्न धार्मिक पर्व और पूजा-पाठ होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि विवाह, गृह प्रवेश या मंदिर प्रतिष्ठा जैसे कुछ कार्यों के पीछे अन्य धार्मिक कारण और काल-विचार होते हैं, उन्हें केवल पितृ पक्ष के कारण वर्जित मानना उचित नहीं है।
अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध के माध्यम से पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा रही है। मान्यता है कि पितर परिवार के सुख, शांति और समृद्धि के लिए आशीर्वाद देते हैं। जिन परिवारों में पुरुष सदस्य नहीं हैं, वहां महिलाओं द्वारा भी तर्पण किए जाने की परंपरा का उल्लेख धर्मग्रंथों में मिलता है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही किसी धारणा को लोग धीरे-धीरे परंपरा या आस्था मानने लगते हैं। ऐसे में पितृ पक्ष को लेकर बनी भ्रांतियों को दूर करते हुए इसके धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को समझना चाहिए। अपने माता-पिता के निधन के बाद वे पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और श्रद्धा का विशेष अवसर मानते हैं तथा हर वर्ष पंडित रमाकांत मिश्र ‘शास्त्री’ से हुई चर्चा के आधार पर इस विषय को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।