बिलासपुर। तारबाहर स्थित PGTBT कॉलेज की तत्कालीन प्राचार्य मीता मुखर्जी के फर्जी हस्ताक्षर और सील का इस्तेमाल कर 5 प्राध्यापकों के तबादले का मामला सामने आया है। कर्मचारियों ने कूटरचित तबादला प्रस्ताव तैयार कर उसे स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय और संचालक के समक्ष पेश किया। इसी प्रस्ताव के आधार पर 5 शिक्षकों के तबादले करा दिए गए। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच की और दस्तावेजों का मिलान करने पर हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। मामले में तारबाहर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद SSP ने जांच तारबाहर थाना प्रभारी को सौंपी थी। जांच के दौरान पुलिस ने तत्कालीन प्राचार्य मीता मुखर्जी के साथ गवाह सोहित कुमार पटेल, अमर कुमार मलिक, माया दत्ता और कार्यालय स्टाफ सुखनंदन लाल साहू के बयान दर्ज किए। संस्थान से जब्त मूल दस्तावेज और सील का मिलान किया गया। जांच में तबादला प्रस्ताव पर किए गए हस्ताक्षर तत्कालीन प्राचार्य के नहीं पाए गए।

आदेश में मिलीं तीन खामियां

जांच के दौरान जारी आदेश क्रमांक 617 में कई गड़बड़ियां सामने आईं। आदेश पर तारीख 13 नवंबर 2025 दर्ज है, लेकिन शैक्षणिक सत्र 2025-26 के स्थान पर 2026-27 लिखा गया था। इसके अलावा छात्राओं ने कॉमन रूम का दरवाजा बदलवाने के लिए आवेदन दिया था। उसकी हस्ताक्षर सूची में काट-छांट कर संचालक SCERT के नाम से फर्जी छात्र संघ का लेटरपैड तैयार किया गया और उसे शिकायत के साथ लगा दिया गया।

संस्था की सील पर तत्कालीन प्राचार्य के हस्ताक्षर भी किए गए थे। प्राचार्य मीता मुखर्जी ने जांच के दौरान इन हस्ताक्षरों को अपना होने से साफ इनकार किया। इसके बाद पुलिस ने दस्तावेजों और मूल रिकॉर्ड का मिलान कर फर्जीवाड़े की पुष्टि की।

संलिप्त कर्मचारियों की पहचान कर होगी कार्रवाई

तारबाहर TI रवि तिवारी ने बताया कि जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद पुलिस ने BNS की धारा 318(4), 336(3), 336(4) और 340 के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना और कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने से संबंधित अपराध शामिल हैं। पुलिस अब फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने में शामिल कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।