शहर में रोज 7.2 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति, एक टंकी में मीटर लगाने पर खर्च होंगे 10 लाख रुपए; 22 टंकियों में ऑटोमेटिक कंट्रोल वाल्व लगाने की भी तैयारी
बिलासपुर। शहर में रोजाना 7.2 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई होती है, लेकिन इसमें से कितना पानी उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है और कितना पाइपलाइन में लीकेज के कारण बर्बाद हो रहा है, इसका सटीक आंकड़ा नगर निगम के पास नहीं है। अब पानी की बर्बादी और वितरण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए निगम शहर की सभी 52 पानी टंकियों में फ्लो मीटर लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए 5.20 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। एक टंकी में फ्लो मीटर लगाने पर करीब 10 लाख रुपए खर्च होंगे। शासन से मंजूरी और राशि मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा।
फ्लो मीटर लगने के बाद निगम यह पता लगा सकेगा कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से टंकी तक कितना पानी पहुंचा और वहां से अलग-अलग इलाकों में कितनी मात्रा में सप्लाई हुई। फिलहाल पानी की मात्रा का हिसाब टंकियों की क्षमता और सप्लाई के अनुमान के आधार पर लगाया जाता है। मीटर लगने से वास्तविक आंकड़े मिलेंगे। इससे पानी की आपूर्ति और वितरण के बीच अंतर का पता चलेगा। जिस इलाके में पानी की मात्रा में असामान्य कमी मिलेगी, वहां पाइपलाइन में लीकेज की जांच कराई जा सकेगी।
22 टंकियों में लगेंगे ऑटोमेटिक कंट्रोल वाल्व
जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए निगम अमृत मिशन के तहत 22 पानी टंकियों में ऑटोमेटिक कंट्रोल वाल्व लगाने की भी तैयारी कर रहा है। इसके लिए करीब 8.90 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाया गया है। इन वाल्वों की मदद से टंकी भरते ही पानी की सप्लाई अपने आप बंद हो जाएगी। इससे टंकियों से पानी ओवरफ्लो होने और बेकार बहने की समस्या पर रोक लग सकेगी।
क्या काम करेगा फ्लो मीटर
फ्लो मीटर पाइपलाइन से गुजरने वाले पानी की मात्रा मापने वाला उपकरण है। इसे टंकी से पानी सप्लाई करने वाली मुख्य पाइपलाइन में लगाया जाएगा। इसके सेंसर पानी के बहाव को मापकर लीटर या घनमीटर में आंकड़े दर्ज करेंगे। इससे पता चलेगा कि टंकी में कितना पानी आया और वहां से कितनी मात्रा में बाहर गया। दोनों आंकड़ों में अंतर मिलने पर लीकेज की जांच आसान होगी।
नगर निगम के जल शाखा प्रभारी अनुपम तिवारी के अनुसार सभी 52 पानी टंकियों में फ्लो मीटर लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इससे पानी की वास्तविक सप्लाई और लीकेज के कारण होने वाली बर्बादी का पता लगाने में मदद मिलेगी।