देवकीनंदन दीक्षित सभाभवन में 2 से 9 अक्टूबर तक सामूहिक भागवत कथा, 1 अक्टूबर को जमा होगी पूर्वजों की तस्वीर

बिलासपुर। माता-पिता या दादा-दादी की बरसी पर भागवत कथा और तर्पण कराने की इच्छा रखने वाले कई परिवार आर्थिक कारणों से अलग से आयोजन नहीं करा पाते। ऐसे परिवारों के लिए शहर में पिछले करीब छह वर्षों से पितृ पक्ष के दौरान निशुल्क सामूहिक भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस बार छठा आयोजन 2 से 9 अक्टूबर तक देवकीनंदन दीक्षित सभाभवन में होगा। इसमें शामिल होने के लिए न पंजीयन की जरूरत है और न ही कोई शुल्क लिया जाएगा।

आयोजन में शामिल होने वाले परिवार 1 अक्टूबर को सुबह से अपने पूर्वज की तस्वीर लेकर सभाभवन पहुंच सकते हैं। वहां पूर्वज का नाम और गोत्र दर्ज किया जाएगा। कथा पंडाल में सभी तस्वीरें रखी जाएंगी और प्रत्येक परिवार के पूर्वज के नाम से अलग संकल्प कराया जाएगा। इसके बाद सभी तस्वीरों का सामूहिक पूजन होगा। खास बात यह है कि परिवार के सदस्य केवल तस्वीर रखकर नहीं जाएंगे, बल्कि आचार्य की देखरेख में स्वयं तर्पण भी करेंगे।

सुबह पूजा-तर्पण, दोपहर में भागवत कथा

आयोजन के दौरान पूजा और तर्पण सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक होगा। इसके बाद दोपहर 2:30 से शाम 6:30 बजे तक भागवत कथा चलेगी। परिवार के जितने सदस्य चाहें, वे पूजा, तर्पण और कथा में शामिल हो सकेंगे। आयोजन के लिए किसी तरह का शुल्क, चंदा या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। कथा पूरी होने के बाद पूर्वजों की तस्वीर परिवार को वापस कर दी जाएगी। चार पंडितों की मौजूदगी में पूजन कराया जाएगा और आचार्य की देखरेख में परिवार के सदस्य तर्पण करेंगे।

कोविड के बाद शुरू हुआ सामूहिक आयोजन

कथा वाचक आचार्य पं. अमर कृष्ण ने बताया कि कोविड के बाद आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई परिवार अलग से धार्मिक आयोजन नहीं करा पा रहे थे। किसी परिवार की बरसी निकल गई तो किसी के पास कथा कराने की इच्छा होने के बावजूद खर्च की व्यवस्था नहीं हो पाई। इसी अनुभव के बाद सामूहिक और निशुल्क भागवत कथा का आयोजन शुरू किया गया। पिछले करीब छह वर्षों में हर साल 30 से 50 परिवार इसमें शामिल होते रहे हैं।

बच्चों और युवाओं को पूर्वजों से जोड़ने की पहल

आयोजकों का कहना है कि आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान कराना नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को भी पूर्वजों के प्रति सम्मान और पारिवारिक परंपराओं से जोड़ना है। पं. अमर कृष्ण ने कहा, "हम जिस पेड़ के फल और पत्ते हैं, उसकी जड़ों को कैसे भूल सकते हैं। पितृ पक्ष में कम से कम अपने पूर्वजों का स्मरण कर दो अंजलि जल जरूर अर्पित करना चाहिए।"

2 से 2.50 लाख रुपए का खर्च आयोजक उठाएंगे

आयोजकों के अनुसार कथा, पंडाल, हवन, पूजन सामग्री और प्रसाद सहित पूरे आयोजन में करीब 2 से 2.50 लाख रुपए खर्च होंगे। यह खर्च आचार्य और सहयोगी संस्थाओं की ओर से उठाया जाएगा। छत्तीसगढ़ प्रांतीय अखंड ब्राह्मण समाज और समग्र ब्राह्मण एकता मंच भी आयोजन में सहयोग कर रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि श्रद्धालुओं से न शुल्क लिया जाएगा, न चंदा और न ही किसी तरह की रसीद काटी जाएगी।