नल कनेक्शन से नक्शा पास कराने और आवास योजना तक में कथित वसूली के आरोप

बिलासपुर। नगर निगम में आम लोगों के काम बिना पैसे के आसानी से नहीं होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। नल कनेक्शन, राशन कार्ड, संपत्ति कर, नक्शा पास कराने, आवास योजना और संपदा से जुड़े कामों में कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर पैसे मांगे जाने के आरोप पार्षदों ने लगाए हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में पार्षदों की ओर से संबंधित कर्मचारी को फोन करने के बाद भी हितग्राही से रकम की मांग किए जाने की शिकायत मिलती है।

हाल ही में संपदा शाखा के एक कर्मचारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद निगम में कामकाज को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पार्षदों के मुताबिक निगम में कई ऐसे काम हैं जो निर्धारित प्रक्रिया और समय के भीतर बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के हो सकते हैं, लेकिन जल्दी काम कराने या फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर कथित तौर पर रकम मांगी जाती है।

कई शाखाओं में लेन-देन की शिकायत

पार्षदों के अनुसार आवास शाखा में हितग्राहियों से रकम मांगने की शिकायतें सामने आती रही हैं। संपदा शाखा में फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर पैसे मांगने के आरोप हैं। खाद्य शाखा में भी छोटे-बड़े कामों के लिए रकम लिए जाने की शिकायतें बताई गई हैं।

नल कनेक्शन को लेकर भी पार्षदों ने निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लिए जाने की शिकायतें बताई हैं। वहीं, राजस्व शाखा में संपत्ति कर के निर्धारण और डिमांड को लेकर भी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। पार्षदों का कहना है कि कई बार अधिक टैक्स की मांग बताने के बाद रकम लेकर उसे कम करने की बात सामने आती है।

भवन शाखा में नक्शा पास कराने और अन्य अनुमति से जुड़े कामों में भी पैसे मांगने की शिकायतें बताई गई हैं। इसी तरह आवास योजना के तहत मकान निर्माण से जुड़े कामों में भी हितग्राहियों से कथित वसूली के आरोप हैं।

कब्जे के मामलों में भी गंभीर आरोप

अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई को लेकर भी कुछ पार्षदों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ मामलों में कब्जा हटाने या कार्रवाई नहीं करने के नाम पर लेन-देन की शिकायतें सामने आती हैं। आरोप यह भी है कि पैसे देने वालों के कब्जे बचे रहते हैं, जबकि रकम नहीं देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनके दस्तावेजी सत्यापन की जरूरत है।

पार्षदों के फोन के बाद भी मांगे जाते हैं पैसे

पार्षदों का कहना है कि वार्ड के लोगों की समस्याओं और लंबित फाइलों को लेकर वे निगम के संबंधित कर्मचारियों को फोन करते हैं। इसके बावजूद कुछ मामलों में हितग्राहियों से पैसे मांगने की शिकायतें उनके पास पहुंचती हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि जनप्रतिनिधियों की सिफारिश के बाद भी लोगों से रकम मांगी जा रही है तो निगम की आंतरिक निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

महापौर बोलीं- सिस्टम में सुधार किया जाएगा

महापौर पूजा विधानी ने कहा कि निगम के सभी जिम्मेदार अधिकारियों और विभाग प्रमुखों से बात कर कामकाज की व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी विभाग प्रमुखों और जोन कमिश्नरों की बैठक लेकर निर्धारित सिस्टम के तहत काम कराने पर मंथन किया जाएगा।

निगम सभापति विनोद सोनी ने कहा कि आम लोगों के काम बिना पैसे के नहीं होने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की भूमिका की जांच के साथ यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि यदि कोई कर्मचारी पैसे ले रहा है तो वह किसके इशारे पर ऐसा कर रहा है।

हालांकि पार्षदों की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए निगम स्तर पर शाखावार जांच और शिकायतों के दस्तावेजी सत्यापन की जरूरत होगी।