बिजली की शिकायतों के लिए पार्षद और निदान 1100 ही सहारा, जीआईएस आधारित एप शुरू होने से पहले ही अटका
बिलासपुर। शहर में स्ट्रीट लाइट बंद होने पर शिकायत दर्ज कराने के लिए नगर निगम ने करीब एक साल पहले जीआईएस आधारित मोबाइल एप तैयार कराया था। दावा किया गया था कि इस एप के जरिए लोग अपने मोबाइल से बंद लाइट की लोकेशन भेजकर शिकायत कर सकेंगे और 24 घंटे के भीतर उसका निराकरण किया जाएगा। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी एप आम लोगों के लिए शुरू नहीं हो सका है। नतीजतन, आज भी लोगों को बंद स्ट्रीट लाइट की शिकायत के लिए पार्षदों या नगर निगम के बिजली विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसके अलावा निदान 1100 पर शिकायत करना ही विकल्प है।
नगर निगम ने शहर के सभी 70 वार्डों में लगी स्ट्रीट लाइट और बिजली के खंभों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के उद्देश्य से यह एप बनवाया था। इसकी मदद से किसी भी खराब स्ट्रीट लाइट की सटीक लोकेशन संबंधित तकनीकी टीम तक पहुंचाई जा सकती थी। इससे कर्मचारियों को खराब खंभा तलाशने में समय नहीं लगता और शिकायतों का निराकरण भी तेजी से हो सकता था। एप पर दर्ज शिकायतों की स्थिति और उनके निराकरण की निगरानी की व्यवस्था भी प्रस्तावित थी। इसके बावजूद एप को आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
36 हजार से अधिक लाइटें, फिर भी कई इलाकों में अंधेरा
शहर में अलग-अलग क्षमता की 36 हजार से अधिक एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। इनमें 28,563 लाइटें ईएसएल ने लगाई हैं। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइट बंद रहने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। निगम के विद्युत यांत्रिकी विभाग के चेयरमैन ने भी शहर की सात सड़कों पर लाइट नहीं जलने की शिकायत की थी, लेकिन इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
एप शुरू होने से लोग सीधे बंद लाइट की लोकेशन भेज सकते थे। इससे शिकायत संबंधित टीम तक पहुंचती और कार्रवाई की निगरानी भी संभव होती। बार-बार शिकायत करने की जरूरत नहीं पड़ती और लोगों को यह भी पता चल सकता था कि उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई।
इंजीनियर के तबादले के बाद अटकी प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार, एप से संबंधित काम इंजीनियर विकास पात्रे देख रहे थे। उनके तबादले के बाद इसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। सवाल यह है कि क्या नगर निगम की पूरी व्यवस्था एक कर्मचारी के भरोसे थी? शहर की हजारों स्ट्रीट लाइटों से जुड़ी सुविधा तैयार होने के बावजूद आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिलना निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।