कोलकाता की इनफिनिटी एकेडमी के डायरेक्टर पर आरोप, सिविल लाइन पुलिस ने जीरो में केस दर्ज कर कालीघाट थाने भेजने की प्रक्रिया शुरू की
बिलासपुर। एमडी रेडियोलॉजी में दाखिला दिलाने का झांसा देकर जरहाभाठा चौक स्थित समाधान नर्सिंग होम की संचालिका डॉ. गौरी दत्त (72) से 14.25 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़िता ने कोलकाता की इनफिनिटी एकेडमी के डायरेक्टर निर्मल्या नाग के खिलाफ सिविल लाइन थाने में शिकायत की है। पुलिस ने जीरो में अपराध दर्ज कर केस डायरी को कोलकाता के कालीघाट थाने भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार डॉ. गौरी दत्त और उनके बेटे डॉ. स्नेहाशीष दत्त ने अमरावती से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। बेटे को एमडी रेडियोलॉजी में दाखिला दिलाने के लिए उन्होंने कोलकाता की इनफिनिटी एकेडमी से संपर्क किया। आरोप है कि एकेडमी के डायरेक्टर निर्मल्या नाग ने मेडिकल कॉलेजों से सीधे टाइअप होने का दावा किया और 1.40 करोड़ रुपए के पैकेज में नेपाल के एक मेडिकल संस्थान में सार्क कोटे से सीट दिलाने का भरोसा दिया।
इस भरोसे में आकर डॉ. गौरी ने अलग-अलग किस्तों में आरोपी को 28 लाख रुपए दिए। अगस्त 2020 में आरोपी ने कथित तौर पर एडमिशन लेटर भी भेजा। बाद में बेटे ने दाखिला नहीं लेने और एडमिशन रद्द कराने की बात कही तो आरोपी ने दिसंबर 2020 तक पूरी रकम लौटाने का लिखित आश्वासन दिया। आरोपी ने करीब 13.75 लाख रुपए वापस कर दिए, लेकिन शेष 14.25 लाख रुपए नहीं लौटाए।
पीड़िता के मुताबिक वर्ष 2024 में आरोपी ने संपर्क करना बंद कर दिया और अपना कार्यालय भी बदल लिया। बकाया रकम लौटाने के लिए दिए गए यस बैंक के चेक फेडरल, केनरा और यूनियन बैंक में बाउंस हो गए। इसके बाद डॉ. गौरी ने पुलिस से शिकायत की। मामला कोलकाता से जुड़ा होने के कारण सिविल लाइन पुलिस ने जीरो में केस दर्ज कर केस डायरी संबंधित थाने भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।
2013 की ठगी में भी अब तक गिरफ्तारी नहीं
बिलासपुर में मेडिकल दाखिले के नाम पर धोखाधड़ी का एक पुराना मामला भी पुलिस की जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। वर्ष 2013 में राजेंद्र नगर की एक मेडिकल छात्रा से सिम्स में सीट दिलाने के नाम पर 4 लाख रुपए की ठगी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने वर्ष 2018 में एफआईआर दर्ज की, लेकिन अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। मामला अब तक 4 सीएसपी, 9 टीआई और एसआई समेत कुल 12 जांच अधिकारियों के पास पहुंच चुका है। वर्ष 2024 में तत्कालीन आईजी संजीव शुक्ला ने इस मामले में 12 लोगों से स्पष्टीकरण भी मांगा था। इसके बावजूद जांच और कार्रवाई का नतीजा सामने नहीं आया।