वे मेरे अत्यंत प्रिय अभिनेता रहे हैं। मन में शोक है, पीड़ा है, उनके इस तरह चले जाने से।
स्मृति के चलचित्र, मन के रूपहले परदे पर मानो चलना आरंभ कर चुके हैं।
मेरे गृहनगर बिलासपुर में उन दिनों नवनिर्मित सिनेमाघर 'गंगा श्री' में एक फिल्म लगी थी - नाम था 'अंकुश'।
जब फिल्म थियेटर में आई, तो लगभग पूरा सिनेमाघर खाली था। पर उन दिनों न तो मोबाइल था, न इंटरनेट और न ही तथाकथित भाड़े के समीक्षक, जो घटिया फिल्म को उम्दा और बेहतरीन फिल्म को कमीशन न मिलने पर उबाऊ करार देते हैं।
माउथ पब्लिसिटी आज भी और उन दिनों भी किसी फिल्म को हिट या फ्लॉप करने का सबसे कारगर कारण होती है।
तो 'अंकुश' किसी ने देखी और उसने अपने मित्र को बताई, और फिर खाली थियेटर भरना शुरू हो गया। फिल्म सुपरहिट साबित हुई।
यहाँ से मेरा परिचय हुआ एक महान अभिनेता से, जिनका नाम है नाना पाटेकर।
जब आप उन्हें पर्दे पर देखते हैं, तो केवल अभिनय ही नहीं, उनकी संवाद अदायगी आपका मन मोह लेती है।
उनकी एक कलात्मक फिल्म, जिसकी चर्चा बहुत कम हुई - 'त्रिशाग्नि'। इसमें वे बौद्ध भिक्षु बने थे, जिनके लिए स्त्री वर्जित है, साधना को भंग करने वाली। पल्लवी जोशी ने उस स्त्री का अभिनय किया था।
वैसे तो लोग 'युगपुरुष' या संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म 'खामोशी' को याद करेंगे, जिसमें उन्होंने गूंगे-बहरे पिता का अविस्मरणीय अभिनय किया था, या उनकी सफल फिल्म 'परिंदा' को, जिसमें उन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई थी, या 'अब तक छप्पन' को, जिसमें वे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इंस्पेक्टर बने थे।
इतने लंबे करियर में उन्होंने राजकुमार साहब के साथ, अमिताभ के साथ, देश के सभी बड़े-छोटे अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के साथ काम किया। मराठी की कम बजट वाली फिल्मों में भी काम किया।
अपनी शर्तों पर जीवन जिया, दिखावे से सदा दूर रहे, हमेशा एक आम आदमी की तरह।
आज मात्र 75 वर्ष की आयु में संसार को छोड़ गए, यह बहुत ही दुख का विषय है। वे हमारे हिंदी और मराठी सिनेमा के एक महान अभिनेता थे।
विनम्र श्रद्धांजलि। 🌹🌹
डॉ. संजय अनंत ©