
हिरीं के बुटेना गांव में छह लोगों पर मारपीट का आरोप, परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल; कलेक्टर-एसएसपी से की शिकायत
बिलासपुर। हिरीं क्षेत्र के ग्राम पथराली में खेत में मवेशी घुसाने के विवाद में एक किसान की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि 25 अगस्त को बुटेना गांव के छह लोगों ने किसान राजू निर्मलकर (52) के साथ बेरहमी से मारपीट की थी। घटना के बाद राजू लहूलुहान हालत में शिकायत करने हिरीं थाने पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने के बजाय आरोपियों के खिलाफ धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। इसके बाद आहत राजू ने घर लौटकर कीटनाशक पी लिया। इलाज के दौरान बुधवार देर रात सिम्स में उनकी मौत हो गई।
खेत की रखवाली करने गए थे राजू
परिजनों के अनुसार, राजू निर्मलकर 25 अगस्त को अपने खेत की रखवाली करने गए थे। इसी दौरान बुटेना गांव के राजू, धन्नू, मनमोहन, संदीप, राकेश और आकाश वहां पहुंचे। आरोप है कि सभी ने राजू पर मवेशियों को खेत में घुसाने का आरोप लगाते हुए उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में राजू गंभीर रूप से घायल हो गए। पत्नी शीला के मुताबिक, राजू लहूलुहान हालत में थाने पहुंचे और घटना की शिकायत की थी।
151 की कार्रवाई पर परिजनों ने उठाए सवाल
परिजनों का आरोप है कि मारपीट की शिकायत के बावजूद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज नहीं किया और केवल धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। इससे राजू काफी आहत थे। घर लौटने के बाद उन्होंने कीटनाशक पी लिया। हालत बिगड़ने पर बुधवार सुबह उन्हें सिम्स में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई।
वहीं, हिरीं थाना प्रभारी दामोदर मिश्रा का कहना है कि राजू ने एफआईआर दर्ज कराने से इनकार किया था, जिसके चलते प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई।
कलेक्टर और एसएसपी से मिले परिजन
किसान की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण कलेक्टर तथा एसएसपी रजनेश सिंह से मिलने पहुंचे। उन्होंने सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही मामले में थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच और कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर मारपीट की घटना में उचित कानूनी कार्रवाई की जाती तो संभवत: स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
मामले की शिकायत मिलने पर एसएसपी रजनेश सिंह ने मौके से ही थाना प्रभारी दामोदर मिश्रा को फोन कर घटना की जानकारी ली। उन्होंने एफआईआर के बजाय प्रतिबंधात्मक कार्रवाई किए जाने पर नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए। एसएसपी ने जांच के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई का आश्वासन परिजनों और ग्रामीणों को दिया है।