मुंगेली में 17 वर्षीय किशोरी की हत्या का मामला, CJM ने दोनों आरोपियों को तत्काल रिहा करने का दिया आदेश; प्रशिक्षु SI से मांगा जवाब
मुंगेली। 17 वर्षीय किशोरी की हत्या के मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों को पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामियां पाए जाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) सतीश कुमार खाखा की अदालत से राहत मिल गई। अदालत ने पुलिस का न्यायिक रिमांड आवेदन खारिज करते हुए दोनों आरोपियों को 25,000-25,000 रुपए के व्यक्तिगत मुचलके पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने गिरफ्तारी के कारणों की लिखित जानकारी देने सहित कानूनी प्रक्रियाओं के पालन में चूक पर गंभीर सवाल उठाए। साथ ही, मामले में कार्रवाई करने वाले प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नवीन कुमार से जवाब मांगा गया है।
मामला मुंगेली जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम नेवासपुर का है। यहां 19 और 20 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात राजनंदनी मोहले की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने से मौत की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया था।
प्रेम प्रसंग और चरित्र पर संदेह को लेकर विवाद का आरोप
पुलिस की जांच के दौरान अजीत घृतलहरे (22), निवासी लिलवाकापा को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने प्रेम प्रसंग और चरित्र पर संदेह को लेकर हुए विवाद के बाद किशोरी की हत्या करने की बात स्वीकार की। आरोप है कि वारदात के दौरान उसका साथी साहिल खाण्डे (20) घर के बाहर निगरानी कर रहा था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के लिए रिमांड आवेदन दिया था।
हालांकि, अदालत ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कुछ कानूनी खामियां पाईं। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी और अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं के पालन को लेकर सवाल उठाए गए।
गिरफ्तारी प्रक्रिया में इन खामियों पर अदालत ने जताई आपत्ति
अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपियों और उनके परिजनों को दिए गए नोटिस में अपराध का पूरा विवरण, समय और स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। गिरफ्तारी के लिखित आधार और जमानत पाने के अधिकार की जानकारी दिए जाने को लेकर भी आपत्ति की गई। इसके अलावा, विवेचना अधिकारी द्वारा दर्ज मेमोरेंडम कथन में समय का उल्लेख नहीं होने की त्रुटि भी सामने आई।
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया केवल औपचारिकता के तौर पर पूरी नहीं की जा सकती। गिरफ्तार व्यक्ति को कानून के तहत प्राप्त अधिकारों की जानकारी देना आवश्यक है। आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी से जुड़े अधिकारों का भी उल्लेख किया गया।
इन प्रक्रियात्मक कमियों के आधार पर अदालत ने पुलिस का न्यायिक रिमांड आवेदन स्वीकार नहीं किया और दोनों आरोपियों की तत्काल रिहाई के आदेश दिए। प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नवीन कुमार से जवाब तलब करने के साथ आदेश की प्रतियां मुंगेली एसएसपी, आईजी और डीजीपी को भेजने के निर्देश भी दिए गए।
मृतका के दादा ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
इस बीच, मृतका के दादा उत्तम मोहले ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई, परिवार को सुरक्षा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। आवेदन के अनुसार, राजनंदनी अपने छोटे भाई रणवीर के साथ गांव में रहती थी, जबकि उसके माता-पिता आजीविका के लिए हैदराबाद गए हुए थे।
दादा ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने घर में घुसकर किशोरी की गला दबाकर हत्या की। उन्होंने मृतका के शरीर पर चोट और खरोंच के निशान होने का भी उल्लेख किया है। परिवार ने आरोपियों को रिहा किए जाने पर चिंता जताते हुए न्यायालयीन आदेश की समीक्षा की मांग की है। परिवार का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उन्हें घटना के बाद सुरक्षा और सहायता की आवश्यकता है।
हत्या के आरोप की गंभीरता और गिरफ्तारी की वैधता अलग-अलग प्रश्न
इस मामले में अदालत का आदेश गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया में सामने आई कमियों से संबंधित है। आरोपियों की रिहाई को हत्या के आरोप से दोषमुक्त होना नहीं माना जा सकता। इसी तरह, पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों को भी न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों की सत्यता का निर्धारण होना बाकी है।
मुंगेली के एसएसपी भोजराम पटेल ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई कर मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया था। इस प्रकार, पुलिस और अदालत के पक्ष के बीच गिरफ्तारी प्रक्रिया के पालन को लेकर सामने आए सवालों पर आगे की स्थिति संबंधित अभिलेखों और जांच से स्पष्ट होगी।