हरिद्वार/बिलासपुर। मीडिया, राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में लगातार सक्रिय स्मृति जैन को हरिद्वार अधिवेशन 2026 के दीक्षांत समारोह में थावे विद्यापीठ की ओर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि ‘विद्यावाचस्पति’ से सम्मानित किया गया। कनखल स्थित परमार्थ ज्ञान मंदिर में 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। स्मृति जैन भारतीय जनता पार्टी की पदाधिकारी होने के साथ समाजसेवा और सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी हुई हैं। धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। मीडिया के क्षेत्र में भी उन्हें लंबे समय का अनुभव प्राप्त है।


स्मृति जैन की सार्वजनिक गतिविधियों का दायरा राजनीति तक सीमित नहीं है। सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता के साथ वे समाज से जुड़े विभिन्न विषयों में रुचि रखती हैं। मीडिया के लंबे अनुभव ने उन्हें सामाजिक गतिविधियों और जनसरोकारों से जुड़े रहने का अवसर दिया है। राजनीति, समाजसेवा और सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता के बीच मानद उपाधि से सम्मानित होना उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


सम्मान को बताया नई प्रेरणा देने वाला


मानद उपाधि प्राप्त होने पर स्मृति जैन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि माता रानी की असीम कृपा और सभी के स्नेह, आशीर्वाद एवं शुभकामनाओं से उन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्होंने इसे अपने लिए गौरव, प्रसन्नता और विनम्रता का विषय बताया। उनके अनुसार, हिंदी साहित्य, भाषा, संस्कृति, शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को यह सम्मान नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करेगा। उन्होंने इस सम्मान के लिए थावे विद्यापीठ के पदाधिकारियों, विद्वतजनों और आयोजकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।


राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हुआ दो दिवसीय अधिवेशन


थावे विद्यापीठ के तत्वावधान में आयोजित हरिद्वार अधिवेशन में राष्ट्रीय संगोष्ठी, काव्यपाठ, सम्मानोपाधि अर्पण, संस्कृति संगम, सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोकार्पण सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। आयोजन में साहित्य, शिक्षा और संस्कृति से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई।


अधिवेशन का आयोजन थावे विद्यापीठ के कुलाधिपति महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक, प्रतिकुलपति डॉ. जंग बहादुर पांडेय और कुलसचिव डॉ. पी.एस. दयाल यति के मार्गदर्शन में हुआ। आयोजन में डॉ. गिरधारी लाल अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे। कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. गजेंद्र तिवारी थे।


स्मृति जैन को ‘विद्यावाचस्पति’ की मानद उपाधि प्रदान किए जाने से उनके सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों में एक और सम्मान जुड़ गया है। मीडिया, राजनीति और सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों से जुड़े उनके अनुभव के बीच यह सम्मान उनके लिए आगे भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने की प्रेरणा का अवसर है।