सिम्स और जिला अस्पताल के मेडिसिन, चेस्ट व पीडियाट्रिक विभाग में 700 से ज्यादा मरीजों का इलाज; ठीक होने में लग रहे 7 से 8 दिन

बिलासपुर। मौसम में बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के साथ शहर में सर्दी-खांसी, वायरल फीवर और एलर्जी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सिम्स और जिला अस्पताल के मेडिसिन, चेस्ट तथा पीडियाट्रिक विभाग में महीनेभर पहले की तुलना में मौसमी बीमारियों के मरीज दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। इन तीनों विभागों में वर्तमान में 700 से अधिक मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें 25 से 30 फीसदी मरीज मौसमी बीमारियों से पीड़ित हैं।

पिछले दो दिनों से हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के कारण मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। डॉक्टरों के मुताबिक तापमान में लगातार बदलाव से वायरल संक्रमण और श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। पहले जहां सामान्य वायरल फीवर तीन से चार दिनों में ठीक हो जाता था, वहीं अब कई मरीजों को पूरी तरह स्वस्थ होने में सात से आठ दिन लग रहे हैं। करीब 10 फीसदी मरीजों को एक सप्ताह के भीतर दोबारा इलाज के लिए अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। वहीं, लगभग 5 फीसदी मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के खुद दवाएं ले रहे हैं।

सड़कों की धूल से बढ़ रही एलर्जी और सांस की परेशानी

मौसम के साथ शहर की खराब सड़कों से उड़ने वाली धूल भी लोगों की सेहत पर असर डाल रही है। मंगला, कुदुदंड, अशोक नगर, चांटीडीह, तोरवा, मिनीमाता नगर, टिकरापारा और व्यापार विहार सहित करीब 26 सड़कों की खराब स्थिति के कारण वाहनों की आवाजाही से धूल उड़ रही है। घरों में साफ-सफाई के दौरान उड़ने वाली धूल भी एलर्जी की समस्या बढ़ा रही है।

धूल के संपर्क में आने से लोगों को लगातार छींक आने, नाक बहने, गले में खराश और आंखों में जलन की शिकायत हो रही है। पहले से अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। तापमान में अंतर और बारिश के बाद चल रही ठंडी हवाओं से बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी सर्दी-खांसी की चपेट में आ रहे हैं।

अब तीन दिन में ठीक नहीं हो रहा वायरल फीवर

सिम्स के टीबी एवं चेस्ट विभाग के डॉक्टर प्रतीक त्रिपाठी ने बताया कि तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच इंफ्लुएंजा सहित श्वसन संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। सभी आयु वर्ग के लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। कई मरीजों को सामान्य होने में सात से आठ दिन लग रहे हैं।

मास्क पहनें, खुद से दवा लेने से बचें

डॉ. प्रतीक त्रिपाठी ने सलाह दी है कि बदलते मौसम और धूल से बचाव के लिए बाहर निकलते समय मास्क पहनें। धूलभरे स्थानों से बचें और घर में साफ-सफाई करते समय भी धूल के सीधे संपर्क में आने से बचें। अस्थमा के मरीज नियमित रूप से निर्धारित दवाएं लें। सर्दी-खांसी, बुखार या सांस लेने में परेशानी होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करें। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को लक्षण बढ़ने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।