हाई कोर्ट ने डॉक्टर पति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना, 26 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई

बिलासपुर। हाई कोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में डॉक्टर पति को दोषी माना है। कोर्ट ने कहा कि पति के अवैध संबंध और लगातार शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना के कारण पत्नी के सामने आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। अब सजा के बिंदु पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इसके लिए आरोपी डॉक्टर और उसके अधिवक्ता को कोर्ट में उपस्थित होने कहा गया है।

मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाली रश्मि प्रकाश ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के भाई आशीष नाथ ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पति डॉ. संजय प्रकाश की हिंसा और प्रताड़ना से परेशान होकर उनकी बहन ने खुदकुशी की।

बिलासपुर की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 28 जून 2016 को मामले में फैसला सुनाते हुए डॉक्टर पति को आईपीसी की धारा 498-ए के तहत 3 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी थी। हालांकि, अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप यानी धारा 306 से उसे बरी कर दिया था। इस फैसले को मृतका के भाई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। वहीं, डॉक्टर ने भी 498-ए के तहत मिली सजा के खिलाफ अपील की थी।

बच्चों ने बताया- नर्स से थे पिता के संबंध

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मृतका के बेटे रोहित, बेटी तनिष्का और अन्य परिजनों के बयानों का बारीकी से परीक्षण किया। बच्चों ने गवाही में बताया कि उनके पिता डॉ. संजय प्रकाश के क्लीनिक में काम करने वाली एक नर्स से संबंध थे। मां ने इसका विरोध किया तो पिता ने उनके साथ मारपीट की। बच्चों के मुताबिक, पिता ने मां पर चाबी भी फेंकी और उसके बाद बेरहमी से पिटाई की।

गवाही में यह भी सामने आया कि मां को पानी में घोलकर बड़ी मात्रा में नींद की गोलियां दी गई थीं, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई थी। घटना से एक दिन पहले भी उनके साथ मारपीट किए जाने और उन्हें तलाक देकर नर्स से शादी करने की धमकी देने की बात बच्चों ने कोर्ट में बताई।

ट्रायल कोर्ट ने सबूतों को अलग-अलग देखने की गलती की

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों को अलग-अलग करके देखने की गलती की। सभी साक्ष्यों को एक साथ देखने पर यह सामने आता है कि पति के लगातार किए गए कृत्यों और प्रताड़ना ने पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर किया।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के लगातार किए गए कृत्यों से ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाएं कि पीड़ित के सामने आत्मघाती कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता न बचे, तो ऐसे मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध बन सकता है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने डॉक्टर पति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना है।