एक दिन में करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन का खुलासा, 10 हजार से 1 लाख रुपये तक मिलता था कमीशन

जांजगीर-चांपा। साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों में खपाने वाले गिरोह के खिलाफ जांजगीर-चांपा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी कमीशन के लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर और नए मोबाइल नंबर जारी कराकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों में देश के अलग-अलग राज्यों से साइबर ठगी की रकम पहुंचने का खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, कुछ खातों के खिलाफ 14 से 15 बार शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि एक दिन में करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है।

पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर साइबर पोर्टल पर मिली शिकायतों की जांच के दौरान इन बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन में किए जाने का पता चला। कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, असम, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से इन खातों के संबंध में शिकायतें मिली थीं। जांच में सामने आया कि खाताधारक ग्रामीण बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन बैंक समेत विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाकर उनके एटीएम और नए मोबाइल नंबर साइबर ठगों को दे देते थे। इसके बदले उन्हें 10 हजार से 1 लाख रुपये तक कमीशन मिलता था।

पुलिस ने मामले में कलेशराम देवांगन उर्फ छोटू (38) और श्यामलाल देवांगन उर्फ राजू (34), निवासी भाठापारा सिवनी, थाना चांपा; लक्ष्मीनारायण पटेल (46), निवासी ग्राम कुम्हारी, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा; वेमेश आदित्य (38), निवासी बुधवारी बाजार, जांजगीर; ज्योति बाई यादव (40), निवासी बनारी डीहपारा, जांजगीर; सुरेश कुमार गढ़ेवाल (32), निवासी ग्राम पाली, नैला क्षेत्र; अनिल राठौर (29), निवासी चंदनिया पारा, जांजगीर और इश्तेखार अहमद (29), निवासी खड़पड़ीपारा, जांजगीर को गिरफ्तार किया है।

पूछताछ में आरोपियों ने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते और मोबाइल नंबर साइबर ठगों को उपलब्ध कराना स्वीकार किया है। पुलिस ने आरोपियों से पासबुक जब्त की हैं। संबंधित खातों में लाखों रुपये की राशि होल्ड कराई गई है। इस रकम की वापसी के लिए संबंधित राज्यों को सूचना दी गई है। मामले में साइबर थाना में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

क्या होता है म्यूल खाता?

म्यूल खाता वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल दूसरे लोगों की अवैध रकम के लेनदेन के लिए किया जाता है। साइबर ठग कमीशन या किराये का लालच देकर दूसरों के बैंक खाते हासिल करते हैं और उनमें ठगी की रकम जमा कराते हैं। जांच के दौरान ऐसे खातों के धारक भी पुलिस की कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

पुलिस ने लोगों से की अपील

जांजगीर-चांपा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या अपने नाम से जारी मोबाइल नंबर किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। कमीशन के लालच में ऐसा करना भारी पड़ सकता है। यदि खाते या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल साइबर अपराध में होता है, तो खाताधारक और नंबर के स्वामी को भी जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।