मसानगंज नवयुवक दुर्गोत्सव समिति का अनूठा प्रयोग, 18 लाख रुपए से तैयार हुआ पंडाल; 58वें दुर्गोत्सव में शिक्षा और सेवा का संदेश
बिलासपुर। शहर में दुर्गोत्सव के दौरान हर साल मसानगंज के पंडाल की थीम को लेकर लोगों में उत्सुकता रहती है। अखबार, चॉकलेट और गुपचुप जैसी अनूठी थीम से लोगों का ध्यान खींचने वाली मसानगंज नवयुवक दुर्गोत्सव समिति ने इस बार स्टेशनरी थीम पर मां दुर्गा का दरबार सजाया है। किताब, कॉपी, पेन, पेंसिल, शार्पनर, रबर, कैंची और फेवीकोल जैसी शैक्षणिक सामग्री से सजा पंडाल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खास बात यह है कि सजावट में इस्तेमाल की गई स्टेशनरी बाद में जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई के काम आएगी। समिति एसएसपी रजनेश सिंह की पहल पर संस्थाओं के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को यह सामग्री वितरित कर रही है।
18 लाख रुपए से तैयार हुआ अनूठा पंडाल
मसानगंज नवयुवक दुर्गोत्सव समिति का यह 58वां दुर्गोत्सव है। इस बार पंडाल को खास शैक्षणिक स्वरूप देने के लिए करीब 18 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। पंडाल के प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मंडप तक स्टेशनरी सामग्री का कलात्मक इस्तेमाल किया गया है। कोलकाता से आए कारीगरों ने किताब-कॉपी और अन्य शैक्षणिक वस्तुओं को आकर्षक तरीके से सजाकर पूरे पंडाल को अलग पहचान दी है। सामान्य तौर पर पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाली ये वस्तुएं यहां मां दुर्गा के दरबार की सजावट का हिस्सा बनी हैं।
सजावट की सामग्री बनेगी बच्चों की पढ़ाई का सहारा
इस थीम की खासियत केवल इसकी अनूठी सजावट नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपा सामाजिक संदेश भी है। पंडाल में इस्तेमाल की गई स्टेशनरी को आयोजन के बाद बेकार छोड़ने के बजाय जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है। एसएसपी रजनेश सिंह की पहल पर संस्थाओं के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में बच्चों को किताब-कॉपी, पेन, पेंसिल, रबर, शार्पनर सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित करने की योजना पर काम हो रहा है। इससे दुर्गोत्सव की सजावट शिक्षा और सेवा से जुड़ रही है। समिति का प्रयास है कि मां दुर्गा के दर्शन के साथ उत्सव का लाभ उन बच्चों तक भी पहुंचे, जिन्हें पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री जुटाने में कठिनाई होती है।
300 कन्याओं को कराया जाएगा भोज
दुर्गोत्सव के दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा गतिविधियां भी की जा रही हैं। सोमवार को 300 कन्याओं को भोज कराया जाएगा। समिति का मानना है कि उत्सव की सार्थकता केवल भव्य सजावट और श्रद्धालुओं की भीड़ तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश भी मिलना चाहिए।
हर साल कुछ नया करने की पहचान
मसानगंज नवयुवक दुर्गोत्सव समिति ने पिछले वर्षों में अपनी अलग-अलग थीम के कारण शहर में पहचान बनाई है। 2023 में न्यूजपेपर, 2024 में चॉकलेट और 2025 में गुपचुप थीम पर पंडाल तैयार किया गया था। इस बार स्टेशनरी थीम के जरिए समिति ने शिक्षा को केंद्र में रखा है। समिति अध्यक्ष नवीन रुपानी और संजय वर्मा के अनुसार, हर साल ऐसी थीम चुनने का प्रयास किया जाता है, जो लोगों को आकर्षित करने के साथ समाज को एक सार्थक संदेश भी दे। इस बार किताब-कॉपी और पेन-पेंसिल से सजा मां का दरबार इसी सोच का उदाहरण है।