पहले दिन 20 घरों के सामने हुई नापजोख, बारिश के कारण रुकी कार्रवाई; अमेरी पटवारी के नहीं पहुंचने से राजस्व रिकॉर्ड के मिलान में आई परेशानी

बिलासपुर। खसरा नंबर 1552 की जमीन पर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार से सीमांकन शुरू किया। पहले दिन अमेरी सरहद से कार्रवाई की शुरुआत करते हुए 20 घरों के सामने जमीन की नापजोख की गई। हालांकि, बारिश के कारण काम बीच में रोकना पड़ा। इस मामले में अब तक 123 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सीमांकन के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जमीन की वास्तविक सीमा कहां तक है और किन हिस्सों में कब्जे की स्थिति है।

सीमांकन के दौरान राजस्व रिकॉर्ड के मिलान में भी परेशानी आई। संबंधित क्षेत्र के अमेरी पटवारी के टीम में शामिल नहीं होने से कई जमीनों के दस्तावेज मौके पर उपलब्ध नहीं हो सके। इस पर मौके पर मौजूद अमले ने तहसीलदार से अमेरी पटवारी को सीमांकन टीम में शामिल करने की मांग की, ताकि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन की स्थिति स्पष्ट की जा सके। कार्रवाई में राजस्व विभाग के आरआई परमेश्वर साहू, विजय जोशी, अनंत सुशील एक्का तथा नगर निगम के सब इंजीनियर जुगल सिंह, राघवेंद्र सिंह और पटवारी हरीश जैन शामिल रहे।

30 फीट की रेलवे जमीन 150 फीट कैसे हुई?

खसरा नंबर 1552 की जमीन को लेकर विवाद का बड़ा पहलू रेलवे लाइन के लिए छोड़ी गई जमीन की चौड़ाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1984 में महावीर नगर मोड़ से उसलापुर तक रेलवे लाइन के लिए 30 फीट जमीन छोड़े जाने का उल्लेख है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग इसी आधार पर रेलवे लाइन के लिए छोड़ी गई जमीन से 30 फीट छोड़कर मकान या दुकान निर्माण की अनुमति देता था। वर्ष 2004 में यह दूरी बढ़ाकर 60 फीट कर दी गई थी। वर्ष 2019 में भी इसी तरह अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अब राजस्व विभाग की ओर से संबंधित जमीन की चौड़ाई 150 फीट बताई जा रही है।

यही अंतर सीमांकन और अतिक्रमण की जांच को महत्वपूर्ण बना रहा है। यदि अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड में जमीन की सीमा और चौड़ाई अलग-अलग दर्ज है, तो यह तय करना जरूरी होगा कि वास्तविक सीमा क्या है और निर्माण किस रिकॉर्ड के आधार पर किए गए। ऐसे में केवल मौके पर नापजोख ही नहीं, बल्कि पुराने राजस्व अभिलेखों, सड़क के रिकॉर्ड और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से जारी अनुमतियों का मिलान भी अहम होगा।

80 फीट की सड़क राजस्व रिकॉर्ड में 110 फीट

मुंगेली रोड की चौड़ाई को लेकर भी विभागीय रिकॉर्ड में अंतर बताया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के रिकॉर्ड में सड़क की चौड़ाई 80 फीट दर्ज है, जबकि पूर्व में हुए सीमांकन के दौरान राजस्व विभाग की टीम ने इसे 110 फीट बताया था। इस तरह सड़क की चौड़ाई को लेकर ही दोनों विभागों के रिकॉर्ड में 30 फीट का अंतर सामने आता है। इसके अलावा रेलवे लाइन के लिए छोड़ी गई जमीन की सीमा को लेकर भी अलग-अलग विवरण सामने आने से स्थिति और उलझ गई है।

खसरा नंबर 1552 की जमीन रविंद्रनाथ टैगोर चौक, पुराने बस स्टैंड, राजीव प्लाजा, इमलीपारा रोड, लिंक रोड, नेहरू नगर, नर्मदा नगर और महावीर नगर से होते हुए उसलापुर के आगे तक फैली बताई जाती है। महावीर नगर में दाऊ मेडिकल के पास से यह जमीन उसलापुर की ओर रेलवे लाइन के दोनों तरफ तक जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1972-73 में इस जमीन का रेलवे से नगर निगम के अधीन आने का उल्लेख है। वर्ष 1928 में इस क्षेत्र से मुंगेली-कवर्धा-मंडला रेलवे लाइन का प्रस्ताव भी बताया जाता है।

सीमांकन के साथ रिकॉर्ड की विसंगति दूर करना भी जरूरी

खसरा नंबर 1552 की जमीन पर 123 लोगों को नोटिस जारी होने के बाद सीमांकन की कार्रवाई से प्रभावित लोगों और स्थानीय निवासियों की नजरें अब विभागीय जांच पर हैं। लेकिन कार्रवाई को स्पष्ट और विवादमुक्त बनाने के लिए नगर निगम, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के रिकॉर्ड का आपस में मिलान जरूरी है। पुराने नक्शों, जमीन हस्तांतरण के दस्तावेजों और निर्माण की अनुमतियों की जांच के बाद ही जमीन की वास्तविक सीमा तथा कथित अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल बारिश के कारण सीमांकन रोकना पड़ा है और अमेरी पटवारी की अनुपस्थिति में कुछ रिकॉर्ड का मिलान भी नहीं हो पाया। अब आगे की कार्रवाई में संबंधित पटवारी को शामिल कर दस्तावेजों के आधार पर सीमांकन पूरा करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि नोटिस जारी किए जाने और अतिक्रमण तय करने की प्रक्रिया स्पष्ट राजस्व रिकॉर्ड पर आधारित हो।