बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के सेलर गांव में जमीन के सीमांकन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी नोटिस तक पहुंच गया है। कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष एवं सेलर के सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला पर प्रशासनिक अमले पर दबाव बनाकर खड़ी फसल के बीच जमीन की नापजोख कराने का आरोप लगाया था। विधायक ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए अधिवक्ता के माध्यम से सरपंच को मानहानि का लीगल नोटिस भेजा है।
सरपंच धनंजय सिंह ठाकुर ने 18 सितंबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया था कि 16 सितंबर को तहसीलदार मनीषा झा और पटवारी रवि डोंगरे उनके घर पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन के सीमांकन के लिए प्रशासनिक अमले पर विधायक सुशांत शुक्ला का दबाव है। सरपंच ने यह भी दावा किया था कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और ग्राम सचिव के तबादले के पीछे भी विधायक का प्रभाव है।
तहसीलदार के मौखिक आदेश पर पहुंचा था पटवारी
मामले में पटवारी रवि डोंगरे ने पंचनामा तैयार किया है। इसमें उल्लेख है कि तहसीलदार के मौखिक आदेश पर खसरा नंबर 120/1, रकबा 11.850 भूमि की स्थल जांच के लिए पहुंचे थे। मौके पर धान की फसल लगी होने के कारण अकेले भूमि का मौका मिलान नहीं किया जा सका। पंचनामा में बताया गया कि टीम गठित कर नियमानुसार सीमांकन किया जाएगा। इस तरह पटवारी बिना सीमांकन किए ही लौट आया।
विधायक ने आरोपों को बताया मिथ्या
सरपंच के सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोपों के बाद विधायक सुशांत शुक्ला की ओर से 'ट्रस्ट लॉ एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स' के माध्यम से लीगल नोटिस भेजा गया है। नोटिस में कहा गया है कि विधायक का राजस्व अथवा सीमांकन की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है और प्रशासनिक अधिकारी स्वतंत्र रूप से नियमों के तहत अपना काम करते हैं। नोटिस में लगाए गए आरोपों को मानहानिकारक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।
तहसीलदार ने जानकारी देने से बनाई दूरी
मामले में तहसीलदार मनीषा झा से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया। सीमांकन संबंधी जानकारी पूछे जाने पर उन्होंने आवेदन देखने की बात कही और फोन काट दिया। इसके बाद कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि उन पर मिथ्या आरोप लगाकर चरित्र चित्रण किया गया है, इसलिए विधि सम्मत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह काफी समय से इसे बर्दाश्त कर रहे थे, लेकिन उनकी चुप्पी को कमजोरी समझा जा रहा था। प्रशासन अपना काम कर रहा है और इसमें किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।