कौवा सॉन्ग से लेकर पीएम मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त पर आपत्तिजनक वीडियो तक, लगातार विवादित पोस्ट से चर्चा में जनता कांग्रेस के अध्यक्ष; सौरभ चंद्राकर के समर्थन में वीडियो जारी कर फिर बढ़ाई राजनीतिक हलचल
एक दौर था, जब छत्तीसगढ़ की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी की तूती बोलती थी। सत्ता के गलियारों में जोगी परिवार का खासा प्रभाव था। लेकिन वक्त बदला तो सियासी परिस्थितियां भी बदल गईं। पिता अजीत जोगी के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत संभालने की कोशिश में जुटे अमित जोगी की राह आसान नहीं रही। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की राजनीतिक जमीन लगातार कमजोर होती गई। कभी प्रदेश की राजनीति में तीसरी ताकत बनने का दावा करने वाली पार्टी आज अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की चुनौती से जूझ रही है। ऐसे में अमित जोगी की हालिया सोशल मीडिया गतिविधियां उन्हें लगातार चर्चा में तो ला रही हैं, लेकिन इनसे उनकी राजनीतिक जमीन मजबूत होने के बजाय नए विवाद खड़े होते दिखाई दे रहे हैं। लोग तो यहां तक कहने लगी है कि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।

अमित जोगी की राजनीतिक मुश्किलों में रामावतार जग्गी हत्याकांड ने भी बड़ी भूमिका निभाई। 2003 के इस चर्चित हत्याकांड में पहले ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए उन्हें हत्या की साजिश में दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि 23 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी। इस कानूनी घटनाक्रम ने उनकी राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।
अब अमित जोगी की सक्रियता का बड़ा माध्यम सोशल मीडिया बन गया है। पिछले कुछ दिनों से उनकी पोस्ट और वीडियो लगातार विवादों में हैं। पहले उन्होंने एक कौवा सॉन्ग जारी किया, जिसकी प्रस्तुति और संदेश को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। इसके बाद उन्होंने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया।
इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलते-जुलते मुखौटे पहने दो पात्रों को 'ज्ञानू-जानू की शादी' के नाम से सांकेतिक विवाह और हनीमून के दृश्यों में दिखाया गया था। वीडियो की भाषा और प्रस्तुति को लेकर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने 2 नवंबर को पोस्ट हटा दी और सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली। उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीतिक विरोध दर्ज कराने का उनका तरीका उचित नहीं था और किसी की निजी सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि माफी के बावजूद विवाद थमा नहीं।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब भाजपा विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रायपुर के सिविल लाइंस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ इस तरह की सामग्री को अमर्यादित बताते हुए कार्रवाई की मांग की। विधायक राजेश मूणत ने 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। सोशल एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला की ओर से भी इस मामले में पुलिस से शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद 4 नवंबर को अमित जोगी के खिलाफ रायपुर के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज होने की खबर सामने आई।
लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका। इस मामले की चर्चा के बीच अमित जोगी ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप मामले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को लेकर भी एक वीडियो जारी कर दिया। इसमें उन्होंने सौरभ चंद्राकर के प्रति अपनी प्रशंसा जाहिर करते हुए खुद को उसका फैन बताया और लोगों से भी उसका प्रशंसक बनने की बात कही। महादेव एप मामले को लेकर छत्तीसगढ़ में पहले से ही राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। ऐसे समय में अमित जोगी की यह टिप्पणी भी चर्चा का विषय बन गई।
इन तमाम घटनाक्रमों को एक साथ देखें तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर अमित जोगी अपनी राजनीति को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं? क्या लगातार विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए वे अपनी खोई हुई राजनीतिक पहचान वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति है? उनकी कांग्रेस में वापसी की संभावनाओं को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि इस दिशा में किसी ठोस राजनीतिक पहल या सहमति की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की संगठनात्मक स्थिति भी उनके लिए चुनौती बनी हुई है। पार्टी को प्रदेश में पहले जैसा जनाधार और राजनीतिक प्रभाव हासिल नहीं हो पाया है। संगठन के भीतर भी सक्रियता और एकजुटता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कभी अजीत जोगी के नाम और प्रभाव के सहारे प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाली पार्टी के सामने अब उस विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती है।
अमित जोगी पेशे से वकील हैं और राजनीतिक परिस्थितियों को समझने का अनुभव भी रखते हैं। ऐसे में उनसे राजनीतिक विरोध और सार्वजनिक संवाद में अधिक संयम की अपेक्षा स्वाभाविक है। प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त पर बनाए गए वीडियो के बाद माफी मांगना और फिर सौरभ चंद्राकर को लेकर नई चर्चा खड़ी करना उनकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में कभी अजीत जोगी परिवार का प्रभाव एक बड़ी ताकत हुआ करता था। आज उसी परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अमित जोगी के कंधों पर है। लेकिन केवल सोशल मीडिया की सुर्खियां राजनीतिक जमीन वापस नहीं दिला सकतीं। इसके लिए संगठन, जनाधार और मुद्दों पर विश्वसनीय राजनीति की जरूरत होती है। फिलहाल अमित जोगी की राजनीतिक सक्रियता से ज्यादा उनके विवाद चर्चा में हैं।